किसानों के लिए बड़ी राहत! MP में अब हर दिन 10 घंटे मिलेगी ‘निर्बाध’ बिजली, विवादित सर्कुलर रद्द – जानें पूरी खबर

किसानों के लिए बड़ी राहत! MP में अब हर दिन 10 घंटे मिलेगी ‘निर्बाध’ बिजली, विवादित सर्कुलर रद्द – जानें पूरी खबर

मध्य प्रदेश के लाखों किसानों को सिंचाई के लिए अब रोज़ाना 10 घंटे तक बिना कटौती के बिजली मिलेगी। सीएम के निर्देश पर विवादित बिजली सर्कुलर तुरंत निरस्त, और लापरवाही पर चीफ इंजीनियर पर सख्त कार्रवाई। कृषि उपभोक्ताओं के लिए नया अपडेट और इसके फायदे।

किसानों के लिए बड़ी राहत! MP में अब हर दिन 10 घंटे मिलेगी 'निर्बाध' बिजली, विवादित सर्कुलर रद्द – जानें पूरी खबर
किसानों के लिए बड़ी राहत! MP में अब हर दिन 10 घंटे मिलेगी ‘निर्बाध’ बिजली, विवादित सर्कुलर रद्द – जानें पूरी खबर

 

 किसानों को मिली बड़ी सौगात: MP में अब रोज़ाना 10 घंटे बिना कटौती बिजली, सीएम ने दिए सख्त निर्देश

मध्य प्रदेश के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने कृषि कार्यों को सुचारू बनाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। नए निर्देशों के तहत, अब किसानों को उनके कृषि फीडरों पर हर दिन 10 घंटे तक बिजली की निर्बाध (Uninterrupted) आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। यह कदम न केवल सिंचाई के संकट को दूर करेगा, बल्कि बिजली वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही भी लाएगा।

 

मुख्यमंत्री का कड़ा रुख: विवादित आदेश निरस्त

किसानों को राहत देने के साथ ही, मुख्यमंत्री ने बिजली विभाग में लापरवाही पर भी कड़ा रुख अपनाया है।

  1. विवादित सर्कुलर निरस्त: हाल ही में बिजली वितरण कंपनी द्वारा एक सर्कुलर जारी किया गया था, जिससे बिजली आपूर्ति की अवधि को लेकर भ्रम और किसानों में असंतोष फैल गया था। मुख्यमंत्री ने इस विवादित सर्कुलर को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का आदेश दिया।
  2. चीफ इंजीनियर पर कार्रवाई: इस भ्रामक और किसान विरोधी सर्कुलर को जारी करने की जिम्मेदारी तय करते हुए, संबंधित बिजली कंपनी के चीफ इंजीनियर को उनके पद से हटा दिया गया है। यह एक्शन प्रशासनिक लापरवाही पर सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दर्शाता है।

 

नया आदेश क्या कहता है और क्यों है यह महत्वपूर्ण?

 

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा जारी किए गए नए निर्देशों में सख्ती और व्यवस्था दोनों पर ज़ोर दिया गया है:

  • 10 घंटे की गारंटी: कंपनी ने साफ किया है कि कृषि फीडरों पर रोजाना 10 घंटे बिजली आपूर्ति हर हाल में पूरी की जाएगी।
  • सैलरी कटेगी: सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर किसी कृषि फीडर पर किसी भी कारण से 10 घंटे से कम बिजली आपूर्ति होती है, तो संबंधित विभागीय अधिकारियों (जैसे AE, DGM, GM) के वेतन में कटौती करने का सख्त प्रावधान किया गया है। यह सीधे तौर पर अधिकारियों को जवाबदेह बनाता है।

 

🚀 इस कदम के पीछे का मुख्य उद्देश्य:

 

कंपनी का कहना है कि 10 घंटे की एक निश्चित और नियंत्रित आपूर्ति सुनिश्चित करने से बिजली वितरण प्रणाली को मजबूती मिलेगी।

उद्देश्य लाभ
सिंचाई प्रबंधन किसानों को फसल की सिंचाई के लिए एक निश्चित समय-सारणी मिलेगी।
वितरण संतुलन अन्य फीडरों पर अतिरिक्त लोड नहीं पड़ेगा और घरेलू बिजली भी प्रभावित नहीं होगी।
तकनीकी सुरक्षा 10 घंटे के नियमानुसार संचालन से ट्रांसफार्मर और वितरण लाइनों पर ओवरलोडिंग (अतिरिक्त दबाव) कम होगा, जिससे बार-बार फॉल्ट होने की समस्या घटेगी।
शिकायतों में कमी एक निश्चित समय मिलने से बिजली आपूर्ति कम होने की भ्रामक खबरें और शिकायतें खत्म होंगी।

 

किसानों पर क्या होगा असर?

 

यह फैसला दोधारी तलवार की तरह है, जिसके फायदे और चिंताएं दोनों हैं:

फायदे (Advantages) चिंताएं (Concerns)
निश्चितता: किसानों को अपनी सिंचाई की योजना बनाने में मदद मिलेगी। सीमा: कुछ किसान 10 घंटे की सीमा से चिंतित हैं, उनका मानना है कि जरूरत पड़ने पर अधिक बिजली मिलनी चाहिए।
बेहतर फसल: समय पर पानी मिलने से फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन बेहतर होगा। राजनीतिक विवाद: विपक्षी दलों ने इसे ’10 घंटे से ज्यादा नहीं’ का नियम बताकर ‘किसान-विरोधी’ ठहराया है।
अधिकारी जवाबदेह: पहली बार, कम बिजली देने पर अधिकारियों के वेतन पर सीधा असर पड़ेगा। व्यवस्था का प्रश्न: इस व्यवस्था की सफलता पूरी तरह से बिजली वितरण कंपनियों के व्यवस्थित और ईमानदार पालन पर निर्भर करेगी।

 

निष्कर्ष

 

मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों को एक निश्चित समय के लिए सुरक्षित और निर्बाध बिजली देने की दिशा में एक ठोस और प्रशासनिक रूप से सख्त कदम उठाया है। 10 घंटे की यह निश्चित आपूर्ति किसानों के लिए राहत भरी है, जो उन्हें अपनी खेती के लिए एक भरोसेमंद शेड्यूल देगी। अब देखना यह है कि बिजली वितरण कंपनियाँ मुख्यमंत्री के इस सख्त आदेश का पालन कितनी प्रभावी तरीके से करती हैं और इस योजना का वास्तविक लाभ खेत तक पहुंचा पाती हैं या नहीं।


 

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