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मध्य प्रदेश में शुरू हुआ “150 वर्ष – वंदे मातरम्” अभियान: 20 दिन तक चलेगा देशभक्ति का उत्सव

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मध्य प्रदेश में शुरू हुआ “150 वर्ष – वंदे मातरम्” अभियान: 20 दिन तक चलेगा देशभक्ति का उत्सव

भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् ने अपनी 150वीं वर्षगाँठ पूरी कर ली है। इस ऐतिहासिक अवसर पर मध्य प्रदेश में बड़ी धूमधाम से एक 20-दिनीय अभियान शुरू हुआ है, जिसमें पूरे प्रदेश में देशभक्ति-भावना को नए सिरे से जगाने का प्रयास किया जा रहा है।

मध्य प्रदेश में शुरू हुआ “150 वर्ष - वंदे मातरम्” अभियान: 20 दिन तक चलेगा देशभक्ति का उत्सव
मध्य प्रदेश में शुरू हुआ “150 वर्ष – वंदे मातरम्” अभियान: 20 दिन तक चलेगा देशभक्ति का उत्सव

इतिहास की झलक

“वंदे मातरम्” के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय हैं, जिन्होंने यह गीत 1875 में लिखा था और इसे उनके उपन्यास आनन्दमठ (1882) में शामिल किया गया।  स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत सिर्फ एक गीत नहीं बल्कि एक आंदोलन की आवाज बन गया था।

प्रदेश में कैसे मनाया जा रहा है यह जश्न

– मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) एवं राज्य सरकार की ओर से 7 नवंबर से 26 नवंबर तक यह अभियान चलेगा।
– इस दौरान प्रदेश भर में कम-से-कम 150 स्थानों पर मूल स्वरूप में वंदे मातरम् का सामूहिक गायन होगा।
– मुख्यमंत्री मोहन यादव भोपाल के शौर्य स्मारक में मुख्य कार्यक्रम करेंगे, जबकि अन्य मंत्री-प्रमुख नगरों में अलग-अलग कार्यक्रमों का नेतृत्व करेंगे।

कार्यक्रमों की रूपरेखा

क्यों है यह पहल खास?

यह अभियान सिर्फ एक गीत-गायन नहीं है बल्कि संस्कृति, इतिहास और आज की पीढ़ी को जोड़ने की एक कोशिश है।

चुनौतियाँ एवं बहस

हालाँकि उत्सव को व्यापक रूप से स्वीकार किया जा रहा है, लेकिन कुछ स्थानों पर इसे लेकर विवाद भी देखने को मिल रहे हैं। उदाहरण के लिए, जम्मू-कश्मीर में इस आयोजन के संदर्भ में धर्म-संबंधित सवाल उठे हैं। ऐसे में यह कार्यक्रम सिर्फ उत्सव नहीं—समाज-सहमति और बहुवाद का मामला भी बन रहा है।

निष्कर्ष

150 वर्ष पूरे कर चुका “वंदे मातरम्” गीत आज उसी ताकत से हमें जोड़ने का काम कर रहा है, जैसी आज़ादी के समय थी। मध्य प्रदेश में इस आयोजन के माध्यम से यह याद दिलाया जा रहा है कि हमारा गीत, हमारी संस्कृति, हमारी एकता — सब मिलकर हमारी शक्ति बनते हैं।
इस अभियान का उद्देश्य केवल इतिहास याद करना नहीं बल्कि उसे आज के संदर्भ में जीवित बनाना है। इस तरह का आयोजन हमें याद दिलाता है कि मातृभूमि के प्रति समर्पण, देशभक्ति, और मिल-जुल कर आगे बढ़ने की भावना आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी कभी थी।

 

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