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सीहोर सार्थक ऐप घोटाला: 32 डॉक्टरों ने फोटो और एक ही मोबाइल से लगाई फर्जी हाजिरी, MP स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप

सीहोर सार्थक ऐप घोटाला: 32 डॉक्टरों ने फोटो और एक ही मोबाइल से लगाई फर्जी हाजिरी, MP स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप

सीहोर सार्थक ऐप घोटाला: 32 डॉक्टरों ने फोटो और एक ही मोबाइल फोन के माध्यम से फर्जी हाजिरी लगाई। ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के साथ हुए इस बड़े धोखे में क्या है सच? जानें प्रशासन की कार्रवाई, जांच रिपोर्ट और पूरे मामले का विश्लेषण।

MP स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप
MP स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप

 


सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की लापरवाही और सिस्टम की खामियों को उजागर करने वाला एक बड़ा घोटाला सामने आया है। यहां 32 बंध डॉक्टरों पर ‘सार्थक ऐप’ में फर्जी हाजिरी (Fake Attendance) लगाने का आरोप लगा है। ये डॉक्टर अस्पताल में मौजूद न होकर भी उपस्थिति दर्ज करवाते थे, जिससे ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर असर पड़ा।

यह मामला सामने आते ही MP स्वास्थ्य विभाग (MP Health Department) से लेकर जिला प्रशासन तक में हड़कंप मच गया है।


✅ सार्थक ऐप क्या है और इसका उपयोग कैसे होता है?

मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की उपस्थिति ट्रैक करने के लिए Saarthak App लॉन्च किया था।
इस ऐप की विशेषताएं:

इसका उद्देश्य था कि डॉक्टर वास्तव में अपने तैनाती स्थल पर मौजूद रहें। लेकिन सीहोर का यह घोटाला बताता है कि सिस्टम को आसानी से धोखा दिया गया।


 कैसे हुआ फर्जीवाड़ा? (How the Fake Attendance Scam Worked)

जांच में जो तथ्य सामने आए, वे चौंकाने वाले हैं और बताते हैं कि कैसे इन डॉक्टरों ने सरकारी सिस्टम को अपने फायदे के लिए मोड़ दिया।

1️⃣ एक ही मोबाइल फोन अस्पताल में रखा जाता था

डॉक्टर अपना निजी मोबाइल न इस्तेमाल करके, एक फोन अस्पताल में छोड़ देते थे।
इससे ऐप में हमेशा वही लोकेशन दिखती थी → “डॉक्टर अस्पताल में मौजूद है”

2️⃣ फोटो से लगाई जाती थी सेल्फी

सार्थक ऐप में सेल्फी से हाजिरी लगती है।
इसके लिए:

यह तरीका लंबे समय तक चलता रहा।

3️⃣ लॉगिन आईडी और पासवर्ड शेयर किए गए

कई डॉक्टरों ने स्वयं अपने ऐप के LOGIN DETAILS स्टाफ को सौंप दिए।
यानि—डॉक्टर नहीं, लेकिन उनकी जगह कोई और उपस्थिति दर्ज कर रहा था।


 किन डॉक्टरों पर आरोप? (Accused Doctors List)

जिले के तीन ब्लॉकों में यह घोटाला फैला हुआ था।

📍 श्यामपुर ब्लॉक – 24 डॉक्टर (सबसे ज्यादा मामले)

📍 इछावर ब्लॉक – 4 डॉक्टर

📍 बुदनी ब्लॉक – 4 डॉक्टर

ये सभी बंध (Bonded) डॉक्टर हैं, जिन्हें मेडिकल शिक्षा सस्ती दर पर मिलने के बदले ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा करना अनिवार्य था — लेकिन जिम्मेदारी निभाने के बजाय इन्होंने सिस्टम का दुरुपयोग किया।


ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा असर

इस घोटाले का सबसे बड़ा नुकसान हजारों ग्रामीण मरीजों को हुआ।

मरीजों को इलाज नहीं मिला

जब डॉक्टर ड्यूटी पर थे ही नहीं, तो:

सरकारी पैसे की बर्बादी

बिना काम किए सरकारी वेतन उठाया गया।
ये पैसा जनता के टैक्स से आता है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा टूटा

ऐसे मामले ग्रामीण जनता के मन में सरकारी स्वास्थ्य तंत्र के प्रति अविश्वास पैदा करते हैं।


 प्रशासन की कार्रवाई: अब क्या होगा?

घोटाला सामने आते ही जिला प्रशासन हरकत में आया।

📌 1. कारण बताओ नोटिस जारी

CMHO डॉ. सुधीर कुमार डेहरिया ने सभी 32 डॉक्टरों को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है।

📌 2. BMO पर भी कार्रवाई के संकेत

जिन ब्लॉकों में यह फर्जीवाड़ा चल रहा था, वहां के BMO (Block Medical Officer) से भी जवाब-तलब किया गया है।

📌 3. अनुबंध रद्द होने का खतरा

यदि डॉक्टर अपना पक्ष मजबूत तरीके से साबित नहीं कर सके, तो:


 क्या तकनीक फेल हुई या निगरानी?

यह घोटाला सिर्फ डॉक्टरों की लापरवाही ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक निगरानी की कमी भी उजागर करता है।

इससे स्पष्ट होता है कि सिर्फ तकनीक लगा देना काफी नहीं — निगरानी जरूरी है।


 निष्कर्ष

सीहोर का यह सार्थक ऐप फर्जीवाड़ा बताता है कि सिस्टम में मौजूद छोटी-छोटी कमियों का फायदा उठाकर कैसे बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार किया जा सकता है।
अब पूरा प्रदेश निगाहें टिकाए हुए है कि प्रशासन:


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