राजगढ़ सुठालिया कांड: अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम के सामने महिला ने खाया जहर, प्रशासन में मचा हड़कंप
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के सुठालिया में सरकारी कॉलेज की जमीन से अतिक्रमण हटाने पहुंची तहसीलदार की टीम के सामने महिला द्वारा सल्फास खाने से हड़कंप। जानें पूरा मामला, परिवार के आरोप और प्रशासन का पक्ष।

राजगढ़: अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम के सामने महिला ने खाया जहर, सल्फास खाने की घटना से हड़कंप – प्रशासन की कार्रवाई पर उठे प्रश्न
राजगढ़, मध्य प्रदेश। विकास और प्रशासनिक कार्रवाई के नाम पर चल रहे अभियान ने राजगढ़ जिले के सुठालिया (Suthaliya) कस्बे में एक बेहद दर्दनाक मोड़ ले लिया। सरकारी कॉलेज की जमीन से कथित अतिक्रमण हटाने पहुंची तहसीलदार की टीम के सामने ही एक महिला ने सल्फास की गोलियां खाकर आत्महत्या का प्रयास कर लिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही मामला राज्य भर में चर्चा का विषय बन गया है।
यह घटना न सिर्फ Madhya Pradesh Latest News का सबसे बड़ा मुद्दा बन गई है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करती है कि क्या प्रशासनिक कार्रवाई मानवीय संवेदनशीलता के बिना की जा सकती है?
कैसे शुरू हुआ घटनाक्रम? सुठालिया में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई
घटना मंगलवार दोपहर की बताई जाती है, जब तहसीलदार दोजीराम अहिरवार के नेतृत्व में प्रशासन, राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम सरकारी कॉलेज (Government College Land) की जमीन पर चल रहे कथित अतिक्रमण को हटाने पहुंची। टीम के साथ जेसीबी मशीन भी मौजूद थी।
प्रशासन का दावा:
यह जमीन सरकारी रिकॉर्ड में कॉलेज और खेल मैदान के लिए दर्ज है और यहां वर्षों से अवैध कब्जा था।
पीड़ित परिवार का दावा:
जमीन पर कब्जा अवैध नहीं, बल्कि पहले से दी गई थी।
उनके अनुसार,
✅ उनकी 16 बीघा से अधिक जमीन सरकार ने पहले ही कॉलेज और अन्य सरकारी उपयोग के लिए अधिग्रहित कर ली थी।
✅ अब उनके पास रहने के लिए सिर्फ एक छोटा सा मकान और एक कुआं बचा था।
✅ परिवार का कहना है कि “यह हमारा आखिरी ठिकाना था।”
धापू बाई ने क्यों खाई सल्फास? पूरा घटनाक्रम विस्तार से
परिवार की सदस्य धापू बाई मेहर, जो घटना की केंद्र में हैं, प्रशासन की कार्रवाई के दौरान बार-बार गुहार लगा रही थीं कि उन्हें उनकी अंतिम बची भूमि पर रहने दिया जाए। परिवार का एक सदस्य मदनलाल मेहर तहसील ऑफिस में चौकीदार के पद पर कार्यरत है, इस कारण उन्हें उम्मीद थी कि उनकी बात जरूर सुनी जाएगी।
लेकिन जब टीम ने मकान खाली करवाने और जेसीबी चलाने की तैयारी शुरू की, तो धापू बाई मानसिक रूप से टूट गईं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार:
✅ धापू बाई ने अपनी जेब से सल्फास की गोलियां निकालीं
✅ तहसीलदार और पुलिस की मौजूदगी में ही उन्हें निगल लिया
✅ मौके पर अफरा-तफरी मच गई, अधिकारी भी घबरा गए
✅ तुरंत उन्हें अस्पताल ले जाया गया
ब्यावरा के निजी अस्पताल में समय रहते इलाज मिलने पर उनकी जान बच गई।
परिवार के गंभीर आरोप: प्रशासन ने अनसुनी की पुकार
घटना के बाद परिवार ने प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए:
🔹 1. शिकायतें नहीं सुनी गईं
परिवार का कहना है कि उन्होंने पहले भी जमीन विवाद की शिकायतें पुलिस और तहसील कार्यालय में दी थीं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
🔹 2. बिना नोटिस तोड़ा घर
परिवार का दावा है कि उन्हें कोई पूर्व सूचना (Notice) नहीं दी गई।
(हालांकि प्रशासन ने इससे इनकार किया है।)
🔹 3. पुनर्वास पर कोई बात नहीं
परिवार की 16 बीघा जमीन ली जा चुकी थी, लेकिन उन्हें न रहने की जगह दी गई और न मुआवजा।
ये आरोप घटना को राज्य राजनीति में बड़ा मुद्दा बना रहे हैं।
प्रशासन का पक्ष — क्या कहा तहसीलदार ने?
तहसीलदार दोजीराम अहिरवार ने मीडिया से बात करते हुए कहा:
- “हम सिर्फ सरकारी जमीन पर कार्रवाई कर रहे थे।”
- “अतिक्रमण पूरी तरह अवैध था।”
- “हमने किसी पर दबाव नहीं बनाया, महिला ने अचानक यह कदम लिया।”
- “महिला के जहर खाने के बाद कार्रवाई रोक दी गई।”
प्रशासन ने यह भी कहा कि वीडियो वायरल होने के बाद मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
राजगढ़ घटना पर ट्रेंडिंग बहस – सिस्टम की संवेदनहीनता?
यह घटना सोशल मीडिया पर #RajgarhNews, #Suthaliya, #SulphasCase, #MadhyaPradeshNews, #GovernmentLandDispute जैसे टैग्स के साथ तेजी से ट्रेंड कर रही है।
सोशल मीडिया पर लोग तीन सवाल पूछ रहे हैं:
✅ 1. क्या विकास के नाम पर इंसान की भावनाएँ मायने नहीं रखतीं?
टीम अतिक्रमण हटाने में इतनी व्यस्त थी कि उसने परिवार की संवेदनाओं को नजरअंदाज कर दिया।
✅ 2. क्या महिला को आत्महत्या जैसा कदम उठाने के लिए मजबूर किया गया?
परिवार कह रहा है कि “अगर प्रशासन बात सुनता, तो यह सब नहीं होता।”
✅ 3. क्या राजस्व विभाग की कार्रवाई में ‘मानवता’ खत्म हो गई है?
ऐसी घटनाएँ बताती हैं कि सिस्टम ज़रूरतमंदों की सुनवाई नहीं कर रहा।
विशेषज्ञों की राय – जिम्मेदारी तय होनी चाहिए
भूमि विवाद विशेषज्ञों का मानना है कि:
- सरकारी कार्रवाई जरूरी है
- लेकिन रियल लोकेशन पर मानवीय संवेदनशीलता सबसे जरूरी होती है
- जिनकी जमीन ली जा रही है, उनके पुनर्वास, मुआवजा और कानूनी सहायता सुनिश्चित होनी चाहिए
- बिना विकल्प दिए बेदखली को “प्रशासनिक ज्यादती” कहा जा सकता है
निष्कर्ष: राजगढ़ की यह घटना सिर्फ आत्महत्या की कोशिश नहीं, सिस्टम की विफलता है
सुठालिया में हुआ यह सल्फास प्रकरण (Suthaliya Sulphas Suicide Attempt) एक परिवार की लाचारी, सिस्टम की असंवेदनशीलता, और प्रशासनिक रवैये का कड़वा सच सामने लाता है।
इस घटना ने कई सवाल छोड़ दिए हैं:
✅ क्या प्रशासन ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाया?
✅ क्या परिवार को पुनर्वास दिया गया?
✅ क्या इतनी बड़ी कार्रवाई बिना मनोवैज्ञानिक सुरक्षा के की जानी सही थी?
✅ क्या सरकार गरीबों की सुनवाई कर रही है?
राज्य सरकार ने घटना की जांच के निर्देश दिए हैं, लेकिन जनता को अब भी यह सवाल बेचैन कर रहा है —
“क्या इस परिवार को न्याय मिलेगा?”