पीथमपुर फैक्ट्री हादसा: शिवम इंडस्ट्रीज में लगी भीषण आग में दो मजदूरों की दर्दनाक मौत, फैक्ट्री प्रबंधन पर FIR
पीथमपुर के सेक्टर-3 स्थित शिवम इंडस्ट्रीज में भीषण आग लगने से दो मजदूरों की दर्दनाक मौत। आग बुझने के बाद टैंकर के नीचे मिले जले हुए शव। फैक्ट्री प्रबंधन पर लापरवाही का मामला दर्ज। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
पीथमपुर, धार। मध्य प्रदेश के औद्योगिक हब पीथमपुर में बुधवार रात एक भीषण हादसा हुआ जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। सेक्टर-3 स्थित शिवम इंडस्ट्रीज में लगी भयावह आग के बाद गुरुवार सुबह जब मलबा हटाया गया तो एक जले हुए टैंकर के नीचे से दो मजदूरों के कंकाल जैसे अवशेष मिले। माना जा रहा है कि आग लगने के समय दोनों मजदूर फैक्ट्री के अंदर ही फंस गए थे और बाहर निकलने का कोई रास्ता न मिलने के कारण जीवित ही जल गए।

यह घटना उद्योगों में सुरक्षा मानकों, फायर सिस्टम, और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
कैसे लगी भीषण आग? (How the massive fire started)
बुधवार रात लगभग 10 बजे, पीथमपुर के सेक्टर-3 में स्थित इस लुब्रिकेंट और केमिकल फैक्ट्री में अचानक आग भड़क उठी। फैक्ट्री में ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण होने के कारण आग ने कुछ ही मिनटों में भयानक रूप ले लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार—
- लपटें इतनी ऊँची थीं कि दूर से दिखाई दे रही थीं।
- आग इतनी तेजी से फैली कि कर्मचारी संभल भी नहीं पाए।
- आग के दौरान धमाकों जैसी आवाजें भी सुनाई दीं, जो केमिकल टैंकरों के फटने की संभावना दर्शाती हैं।
अब तक आग लगने के संभावित कारणों में शॉर्ट सर्किट को प्राथमिक आधार माना जा रहा है, लेकिन FSL की रिपोर्ट इसका वास्तविक कारण तय करेगी।
6 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन (Six-hour long fire-fighting operation)
आग की सूचना मिलते ही पीथमपुर नगरपालिका की फायर ब्रिगेड, पुलिस और औद्योगिक क्षेत्र की निजी कंपनियों की फायर फाइटिंग टीमें मौके पर पहुंचीं।
दमकलकर्मियों को आग बुझाने में:
- करीब 16 से अधिक फायर टेंडर तैनात किए गए
- लगातार 6 घंटे तक आग से जूझना पड़ा
- गुरुवार सुबह लगभग 4 बजे जाकर आग पर काबू मिला
फैक्ट्री का अधिकांश हिस्सा आग की चपेट में पूरी तरह नष्ट हो गया।
सुबह हुआ भयावह खुलासा (The horrifying discovery)
जब FSL टीम और पुलिस ने गुरुवार सुबह मलबा हटाना शुरू किया, तो एक दर्दनाक दृश्य सामने आया।
- एक जले हुए टैंकर के नीचे से दो मजदूरों के जले हुए शव मिले
- दोनों की हालत इतनी गंभीर थी कि वे कंकाल जैसी अवस्था में थे
- एक शव की पहचान नीरज अहिरवार (25 वर्ष) के रूप में हुई
- नीरज सागर जिले का रहने वाला था और दो बच्चों का पिता था
- दूसरा शव अभी भी अज्ञात है, पर जानकारी मिली है कि वह मजदूर गुजरात से आया था और कुछ दिन पहले ही फैक्ट्री में काम पर रखा गया था
दोनों के परिजनों को सूचना देकर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
फैक्ट्री प्रबंधन पर दर्ज हुई FIR (FIR lodged against factory management)
हादसे ने मजदूर सुरक्षा और फैक्ट्री संचालन पर बड़ी चूक को उजागर किया है।
पुलिस ने फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ:
- IPC 304A – लापरवाही से मौत का कारण बनना
- IPC 285 – आग या ज्वलनशील पदार्थों में लापरवाही
के तहत मामला दर्ज किया है।
जांच के मुख्य बिंदु:
- क्या फैक्ट्री में फायर सेफ्टी उपकरण सही तरीके से मौजूद थे?
- क्या मजदूरों को फायर ड्रिल या प्रशिक्षण दिया गया था?
- क्या रात की शिफ्ट में सुरक्षा अलार्म और इमरजेंसी एग्जिट सक्रिय थे?
- क्या फैक्ट्री में ज्वलनशील पदार्थों का सुरक्षित भंडारण किया गया था?
प्रारंभिक जांच में कई खामियां सामने आ रही हैं, लेकिन पुलिस और श्रम विभाग अंतिम रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहे हैं।
मजदूर सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल (Serious questions on worker safety)
पीथमपुर जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र में यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई फैक्ट्रियों में:
- सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया
- फायर उपकरण गैर-कार्यशील पाए गए
- मजदूरों को प्रशिक्षण नहीं दिया गया
- केमिकल्स का भंडारण नियमों के विपरीत पाया गया
इस घटना के बाद मजदूरों में भारी भय और नाराजगी है। कई मजदूरों ने कहा कि सुरक्षा मानकों का पालन न करना ज्यादातर फैक्ट्रियों में आम बात हो चुकी है।
प्रशासन की सख्त प्रतिक्रिया (Strict reaction from administration)
धार जिला प्रशासन ने तत्काल:
- पूरे क्षेत्र की सभी फैक्ट्रियों का फायर सेफ्टी ऑडिट कराने के आदेश दिए
- शिवम इंडस्ट्रीज के प्रबंधन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी
- औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षा नियमों का पालन अनिवार्य करने के निर्देश जारी किए
कलेक्टर ने कहा कि यदि फैक्ट्री दोषी पाई गई, तो उसके लाइसेंस तक रद्द किए जा सकते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
पीथमपुर के शिवम इंडस्ट्रीज की फैक्ट्री में लगी भीषण आग सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि एक गंभीर चेतावनी है। दो मजदूरों की जान चली गई—लेकिन यह घटना उन हजारों मजदूरों के लिए भी चिंता का विषय है जो रोजाना खतरनाक परिस्थितियों में काम करते हैं।
जब तक:
- फैक्ट्रियों में सुरक्षा मानकों का ईमानदारी से पालन नहीं होगा
- प्रशासन नियमित निरीक्षण नहीं करेगा
- और प्रबंधन मजदूरों की सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं देगा
तब तक ऐसे हादसे फिर से होते रहेंगे।
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