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मध्य प्रदेश ने रचा इतिहास: देश का पहला हाई-टेक वन्यजीव ऑपरेशन, 900 से ज्यादा कृष्णमृग और नीलगाय सुरक्षित स्थानांतरित

मध्य प्रदेश ने रचा इतिहास: देश का पहला हाई-टेक वन्यजीव ऑपरेशन, 900 से ज्यादा कृष्णमृग और नीलगाय सुरक्षित स्थानांतरित

मध्य प्रदेश में वन विभाग ने देश का पहला हाई-टेक वन्यजीव कैप्चर अभियान चलाकर 900 से अधिक कृष्णमृग और नीलगाय को सुरक्षित रूप से नए आवासों में स्थानांतरित किया। यह अभियान मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।

मध्य प्रदेश ने रचा इतिहास: देश का पहला हाई-टेक वन्यजीव ऑपरेशन, 900 से ज्यादा कृष्णमृग और नीलगाय सुरक्षित स्थानांतरित
मध्य प्रदेश ने रचा इतिहास: देश का पहला हाई-टेक वन्यजीव ऑपरेशन, 900 से ज्यादा कृष्णमृग और नीलगाय सुरक्षित स्थानांतरित

 


 मध्य प्रदेश बना वन्यजीव संरक्षण का अग्रणी राज्य

मध्य प्रदेश ने एक बार फिर पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में देशभर में मिसाल कायम की है। राज्य के वन विभाग ने भारत का पहला हाई-टेक वन्यजीव कैप्चर ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया है, जिसमें 846 कृष्णमृग (Blackbuck) और 67 नीलगाय (Blue Bull) को सुरक्षित रूप से पकड़कर संरक्षित क्षेत्रों में स्थानांतरित किया गया।
यह ऐतिहासिक अभियान मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) को कम करने और किसानों की फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चलाया गया था।


 क्यों जरूरी था यह हाई-टेक ऑपरेशन?

मध्य प्रदेश के कई कृषि प्रधान जिलों — राजगढ़, विदिशा, शिवपुरी और गुना — में पिछले कुछ वर्षों से नीलगाय और कृष्णमृग किसानों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए थे।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह स्थिति कृषि सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण — दोनों के लिए खतरा बन चुकी थी। इसलिए एक ऐसा समाधान जरूरी था जो जानवरों की जान भी बचाए और किसानों का नुकसान भी रोके।


 कैसे काम किया हाई-टेक कैप्चर सिस्टम ने?

इस पूरे ऑपरेशन को ‘हाई-टेक’ इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि इसमें परंपरागत जाल या शिकार जैसे तरीकों की बजाय अत्याधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल किया गया।

  1. ड्रोन सर्विलांस (Drone Surveillance):
    झुंडों की लोकेशन और मूवमेंट को ट्रैक करने के लिए उच्च-रिज़ॉल्यूशन कैमरों वाले ड्रोन का इस्तेमाल हुआ।
  2. ट्रैंक्विलाइज़र डार्ट्स (Tranquilizer Darts):
    विशेषज्ञ टीमों ने जानवरों को बिना चोट पहुँचाए सुलाने के लिए नियंत्रित मात्रा वाले डार्ट्स का प्रयोग किया।
  3. जीपीएस कॉलर (GPS Tracking Collars):
    पकड़े गए कुछ जानवरों पर GPS कॉलर लगाए गए ताकि भविष्य में उनके मूवमेंट और व्यवहार की निगरानी की जा सके।
  4. सुरक्षित बाड़े (Bomas):
    अस्थायी बाड़ों में जानवरों को कुछ समय के लिए रखा गया, जहाँ उनका मेडिकल चेक-अप और रिकवरी सुनिश्चित की गई।

📊 अभियान के परिणाम — आंकड़ों में सफलता

क्रमांक वन्यजीव का नाम पकड़ी गई संख्या उद्देश्य
1️⃣ कृष्णमृग (Blackbuck) 846 फसल सुरक्षा और संरक्षण
2️⃣ नीलगाय (Blue Bull) 67 फसल क्षति रोकना और सड़क दुर्घटना नियंत्रण
कुल 913

 कहाँ से पकड़े गए और कहाँ ले जाए गए?

यह अभियान मुख्यतः उन इलाकों में चलाया गया जहाँ कृषि भूमि और वन क्षेत्र पास-पास हैं — जैसे राजगढ़, शिवपुरी, गुना और विदिशा।
पकड़े गए सभी जानवरों को सावधानीपूर्वक विशेष वाहनों से वन्यजीव अभयारण्यों, राष्ट्रीय उद्यानों और सुरक्षित वनक्षेत्रों में पहुँचाया गया, जहाँ उनके लिए पर्याप्त चारा, पानी और सुरक्षा का प्रबंध किया गया।


 किसानों को राहत और पर्यावरण को नया संतुलन

इस ऑपरेशन के बाद प्रभावित जिलों के हजारों किसानों ने राहत की सांस ली है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान न केवल किसानों के लिए वरदान है, बल्कि यह आने वाले वर्षों में वन्यजीव संरक्षण नीति (Wildlife Management Policy) के लिए भी मॉडल बन सकता है।


 तकनीक और संरक्षण का अनोखा मेल

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस हाई-टेक अभियान ने साबित कर दिया कि तकनीक और पारिस्थितिकी का मेल सही दिशा में किया जाए तो दोनों ही सुरक्षित रह सकते हैं।


 अधिकारियों की राय

राज्य के प्रमुख वन्यजीव अधिकारी ने कहा:

“यह सिर्फ एक ऑपरेशन नहीं, बल्कि मानव और वन्यजीव के बीच संतुलन बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। यह मॉडल देशभर के लिए प्रेरणा बन सकता है।”

वहीं, स्थानीय किसानों ने कहा कि अब वे बिना डर के खेती कर सकेंगे, क्योंकि खेतों में नीलगाय और कृष्णमृग का खतरा काफी कम हो गया है।


निष्कर्ष: संरक्षण और विकास का संगम

मध्य प्रदेश का यह हाई-टेक वन्यजीव कैप्चर ऑपरेशन दर्शाता है कि जब प्रशासन, तकनीक और पर्यावरण एक साथ काम करें, तो असंभव दिखने वाले लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।
यह न केवल किसानों के लिए राहत है, बल्कि यह बताता है कि भारत का विकास अब प्रकृति के साथ कदम मिलाकर आगे बढ़ सकता है।


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