मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नर्मदा में छोड़े मगरमच्छ, कहा – “मां नर्मदा का वाहन अपने घर लौट आया”
खंडवा, मध्य प्रदेश।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पर्यावरण संरक्षण और नदी पुनर्जीवन अभियान को आगे बढ़ाते हुए खंडवा जिले के साकल घाट पर नर्मदा नदी में मगरमच्छों को प्राकृतिक आवास में पुनर्स्थापित किया। इस कार्यक्रम को राज्य सरकार की “नर्मदा संरक्षण एवं नदी पुनर्जीवन पहल” की एक बड़ी कड़ी माना जा रहा है।
मध्य प्रदेश:आखिर क्यों छोड़े मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नर्मदा में छोड़े मगरमच्छ, जाने पूरी बात
सीएम मोहन यादव ने इस अवसर पर कहा कि मगरमच्छ को प्राचीन परंपराओं में “मां नर्मदा का वाहन” कहा गया है, और इसे वापस नदी में बसाना न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि नदी के इकोसिस्टम को संतुलित करने का भी प्रयास है।

मगरमच्छ क्यों ज़रूरी हैं? | Environmental Impact
विशेषज्ञों के अनुसार, मगरमच्छ नदी के पारिस्थितिकी संतुलन में कीस्टोन प्रजाति (Keystone Species) की भूमिका निभाते हैं।
इनकी उपस्थिति से नदी का पर्यावरण मजबूत रहता है:
| भूमिका | लाभ |
|---|---|
| मछलियों की आबादी को नियंत्रित करते हैं | जैव विविधता संतुलित रहती है |
| मृत जीवों को खाते हैं | नदी साफ़ रहती है |
| प्राकृतिक खाद्य श्रृंखला को बनाए रखते हैं | पारिस्थितिकी चक्र स्थिर रहता है |
यानी मगरमच्छ सिर्फ जंगली जीव नहीं, बल्कि नदी के डॉक्टर हैं।
स्थानीय लोगों की सुरक्षा का पूरा ध्यान
सरकार ने मगरमच्छों को ऐसे क्षेत्र में छोड़ा है जहाँ:
- मानव आबादी कम है
- नदी का नैसर्गिक आवास प्राकृतिक रूप से अनुकूल है
- सुरक्षा चेतावनी संकेत पहले से लगाए जा चुके हैं
सरकार ने साफ़ कहा कि:
“संरक्षण होगा, लेकिन किसी भी स्थानीय नागरिक की सुरक्षा से समझौता नहीं।”
नर्मदा संरक्षण अभियान में यह कदम बड़ा संकेत
हाल के वर्षों में सरकार ने:
- चंबल नदी में घड़ियाल पुनर्स्थापना
- विभिन्न जलस्रोतों में जैव विविधता बढ़ाने
- नदी तट क्षेत्र में वन विस्तार
जैसी योजनाओं पर काम किया है।
अब नर्मदा में मगरमच्छों की वापसी इस बड़े अभियान का विस्तार माना जा रहा है।
सांस्कृतिक भावनाओं से जोड़कर संरक्षण
सीएम मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा:
“हमारी संस्कृति में नदियों को मां माना गया है। मां नर्मदा सिर्फ जलधारा नहीं, बल्कि जीवनधारा है। मगरमच्छ का लौटना सिर्फ पर्यावरण की बात नहीं, यह हमारी आस्था और प्रकृति के सहअस्तित्व का संदेश है।”
उन्होंने स्थानीय जनता से नर्मदा सफाई और नदी तट विकास में सहयोग की अपील की।
मुख्यमंत्री का यह कदम केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि नदी संरक्षण, जैव विविधता पुनर्जीवन और सांस्कृतिक धरोहर को मजबूत करने की दिशा में व्यावहारिक पहल है।
यदि यह प्रयास निरंतर चलता रहा तो:
- नर्मदा का पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होगा
- भविष्य की पीढ़ियों को स्वच्छ जल स्रोत मिलेगा
- और मध्य प्रदेश वन्यजीव संरक्षण के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में उभर सकता है।