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खंडवा में नकली नोट रैकेट का खुलासा: मौलाना के कमरे से 19 लाख के फर्जी नोट बरामद, मालेगांव कनेक्शन से जांच तेज

खंडवा में नकली नोट रैकेट का खुलासा: मौलाना के कमरे से 19 लाख के फर्जी नोट बरामद, मालेगांव कनेक्शन से जांच तेज


खंडवा के पैठिया गांव में पुलिस ने इमाम के कमरे से 19.78 लाख रुपये के नकली नोट बरामद किए। मालेगांव कनेक्शन सामने आने के बाद इंटरस्टेट नकली नोट रैकेट की जांच तेज।

खंडवा (मध्य प्रदेश)। खंडवा जिले के जावर थाना क्षेत्र के पैठिया गांव में नकली नोटों का एक बड़ा रैकेट उजागर हुआ है। पुलिस ने गांव स्थित एक मदरसे के कमरे की तलाशी के दौरान लगभग 19.78 लाख रुपये के नकली नोट, नोटों की कटिंग मशीन और विशेष कागज बरामद किए हैं। यह कमरा उस व्यक्ति का था जो पिछले कुछ महीनों से गांव में इमाम तथा शिक्षक के रूप में रह रहा था, लेकिन उसका नाम हाल ही में महाराष्ट्र के मालेगांव में नकली नोट सहित गिरफ्तारी के मामले में सामने आया।

इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने इसे एक अंतर-राज्यीय नकली मुद्रा गिरोह से जुड़ा मामला माना है। जांच में कई और राज्यों के कनेक्शन सामने आने की संभावना जताई जा रही है।


मामला कैसे उजागर हुआ? सोशल मीडिया पोस्ट ने बदला रुख

घटना की शुरुआत तब हुई जब सोशल मीडिया पर एक खबर वायरल हुई।
इस खबर के अनुसार, महाराष्ट्र पुलिस ने मालेगांव (नासिक) में दो व्यक्तियों को लगभग 10 लाख के नकली नोटों के साथ गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार आरोपियों में से एक का नाम था जुबेर अंसारी, जो मूल रूप से बुरहानपुर जिला (मध्य प्रदेश) का रहने वाला है।

गांव के लोगों ने जब उसका फोटो देखा, तो उन्हें संदेह हुआ कि वही युवक पिछले तीन माह से पैठिया गांव की मस्जिद में इमाम और मदरसे में बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहा था।

यह जानकारी तुरंत जावर थाना पुलिस तक पहुंचाई गई।


पुलिस की तत्काल कार्रवाई: कमरे में छापा और खुलासा

सूचना मिलते ही पुलिस की टीम गांव पहुंची और उस कमरे की तलाशी ली, जिसमें आरोपी रहा करता था।
तलाशी में पुलिस को:

बरामद हुईं।

प्राथमिक जांच में सामने आया कि नकली नोटों की छपाई कहीं और की जाती थी, जबकि यहां स्टोरेज और वितरण का काम किया जा रहा था।


आरोपी की भूमिका और पृष्ठभूमि क्या है?

जांच से जुड़े पुलिस अधिकारियों के अनुसार:

यह सामने आया कि आरोपी अपनी वास्तविक पहचान और गतिविधियों को छिपाकर गांव में रह रहा था।


मालेगांव कनेक्शन और इंटरस्टेट नेटवर्क की जांच

खंडवा पुलिस अब महाराष्ट्र पुलिस से समन्वय कर रहीं है ताकि इन सवालों के जवाब मिले:

  1. नकली नोटों की छपाई कहाँ होती थी?
  2. सप्लाई किन-किन जिलों और राज्यों में की जा रही थी?
  3. क्या रैकेट में और लोग भी शामिल हैं?
  4. क्या यह गैंग किसी बड़े नेटवर्क से जुड़ा है?

पुलिस का मानना है कि यह सिर्फ स्थानीय स्तर का मामला नहीं है, बल्कि यह फेक करेंसी सर्कुलेशन का एक संगठित नेटवर्क हो सकता है।


आगे क्या? पुलिस ने अलर्ट जारी किया

पुलिस ने आसपास के जिलों और बैंकों को सचेत किया है कि:

जावर थाना प्रभारी ने कहा:

“मामला संवेदनशील है। हम इसे अत्यंत गंभीरता से जांच रहे हैं। हर सुराग जोड़कर नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाएगा।”


निष्कर्ष

खंडवा का यह मामला स्पष्ट रूप से दिखाता है कि नकली नोटों का कारोबार गहराई तक फैला हुआ है, और इसे संगठित अपराध गिरोह चला रहे हैं।
इस मामले में पुलिस की तत्परता और गांववालों की सतर्कता ने एक बड़े नेटवर्क को उजागर होने से पहले ही पकड़ लिया।

यह कार्रवाई देश की अर्थव्यवस्था और आम नागरिक की सुरक्षा से जुड़े मामलों में जागरूकता और सतर्कता की एक महत्वपूर्ण मिसाल है।


 

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