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Jabalpur News : जबलपुर में शुक्रवार की छुट्टी को लेकर मचा बवाल, प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद अंजुमन इस्लामिया स्कूल ने वापस लिया फैसला

जबलपुर में शुक्रवार की छुट्टी को लेकर मचा बवाल, प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद अंजुमन इस्लामिया स्कूल ने वापस लिया फैसला

जबलपुर : Jabalpur News
मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में शुक्रवार की छुट्टी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब थम गया है।
अंजुमन इस्लामिया वक्फ बोर्ड द्वारा संचालित स्कूलों में शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश घोषित करने के आदेश ने पूरे शहर में राजनीतिक और सामाजिक हलचल मचा दी थी।
लगातार बढ़ते विरोध और प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद स्कूल प्रबंधन को अपना फैसला वापस लेना पड़ा। अब इन स्कूलों में पहले की तरह रविवार को ही छुट्टी रहेगी।

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🏫 क्या है पूरा मामला?

मामला जबलपुर के मालवीय चौक स्थित अंजुमन इस्लामिया इंग्लिश मीडियम स्कूल से जुड़ा है।
स्कूल प्रबंधन ने सत्र 2025–26 के लिए एक आंतरिक आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि अब स्कूल में शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश रहेगा और रविवार को कक्षाएं लगेंगी
जैसे ही यह आदेश सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, शहर में तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं।


📋 स्कूल प्रबंधन का तर्क: ‘जुमे की नमाज के कारण उपस्थिति कम रहती थी’

स्कूल प्रबंधन ने अपने बचाव में कहा कि स्कूल में अधिकांश छात्र मुस्लिम समुदाय से हैं।
हर शुक्रवार को जुमे की नमाज के कारण छात्रों की उपस्थिति बहुत कम रहती थी — कभी-कभी 700 में से केवल 10–20 छात्र ही स्कूल आते थे।
इससे पढ़ाई का नुकसान हो रहा था।
प्रबंधन के अनुसार, छात्रों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए शुक्रवार को छुट्टी देना और रविवार को पढ़ाई कराना एक “शैक्षणिक निर्णय” था, न कि धार्मिक।


विरोध और विवाद की शुरुआत

जैसे ही आदेश सार्वजनिक हुआ, स्थानीय संगठनों, अभिभावकों और राजनीतिक दलों ने इसका कड़ा विरोध किया।
कुछ अभिभावकों का कहना था कि यह फैसला शिक्षा प्रणाली में धार्मिक भेदभाव को बढ़ावा देता है।

भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के नेता मुज्जमिल अली ने आरोप लगाया कि यह आदेश “अनुचित और असंवैधानिक” है।
उन्होंने कहा —

“दीपावली, दशहरा या गणेशोत्सव जैसे त्योहारों पर तो केवल एक दिन की छुट्टी दी जाती है,
लेकिन शुक्रवार को नियमित साप्ताहिक अवकाश बनाना नियमों के विपरीत है।”

यह मुद्दा देखते-देखते सोशल मीडिया पर #JabalpurSchoolRow और #FridayHolidayControversy जैसे हैशटैग के साथ ट्रेंड करने लगा।


🧾 प्रशासन ने लिया संज्ञान, स्कूल का ताला खुलवाया

जैसे-जैसे विवाद बढ़ा, जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग हरकत में आए।
डिप्टी कलेक्टर आर.एस. मरावी के नेतृत्व में एक टीम स्कूल पहुंची, जहां स्कूल का ताला बंद पाया गया।
अधिकारियों ने ताला तुड़वाकर स्कूल को खुलवाया और प्रबंधन से तत्काल आदेश वापस लेने को कहा।

डिप्टी कलेक्टर ने स्पष्ट कहा —

“राज्य सरकार के शिक्षा नियमों में शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश घोषित करने का कोई प्रावधान नहीं है।
सभी स्कूलों में रविवार को ही छुट्टी रहेगी।”


🕊️ आदेश वापस, स्थिति सामान्य

प्रशासनिक दबाव और जनविरोध के बाद अंजुमन इस्लामिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष अन्नू अनवर ने आदेश वापस ले लिया।
उन्होंने मीडिया से कहा —

“हमने यह निर्णय केवल बच्चों की शिक्षा को ध्यान में रखकर लिया था।
लेकिन शिक्षा विभाग के निर्देश के अनुसार, अब आदेश को रद्द किया जा रहा है।
स्कूल रविवार को ही बंद रहेंगे।”

इस घोषणा के बाद विवाद थम गया और स्कूलों में सामान्य पढ़ाई दोबारा शुरू हो गई।


🔍 अब बाकी स्कूलों की होगी जांच

जबलपुर प्रशासन ने कहा है कि अंजुमन इस्लामिया बोर्ड के अंतर्गत आने वाले अन्य चार स्कूलों और एक कॉलेज की भी जांच की जाएगी।
अगर वहां भी शुक्रवार को अवकाश की परंपरा चल रही है, तो उसे तुरंत समाप्त किया जाएगा।

जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने कहा कि सभी निजी और वक्फ बोर्ड से जुड़े स्कूलों को राज्य सरकार के शैक्षणिक कैलेंडर का पालन करना होगा।
किसी भी संस्था को अपने स्तर पर अवकाश तय करने की अनुमति नहीं है।


🗣️ राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और सोशल मीडिया बहस

इस मामले पर राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं आईं।
हैदराबाद के विधायक टी. राजा सिंह ने सोशल मीडिया पर कहा —

“यह भारत है, यहां किसी भी संस्था को शरिया कानून लागू करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।”

उनके बयान के बाद विवाद और भड़क गया, लेकिन प्रशासनिक सख्ती और त्वरित कार्रवाई के कारण स्थिति नियंत्रण में आ गई।
इस प्रकरण ने धर्मनिरपेक्ष शिक्षा नीति और शैक्षणिक संस्थानों में समानता के मुद्दे पर एक नई बहस छेड़ दी है।

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