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Indore BJP Controversy: गैंगस्टर की पत्नी स्वाति कासिद को ‘नगर मंत्री’ बनाना पड़ा भारी

Indore BJP Controversy: गैंगस्टर की पत्नी स्वाति कासिद को ‘नगर मंत्री’ बनाना पड़ा भारी, भाजपा की ‘Zero Tolerance Policy’ पर उठे सवाल

इंदौर, मध्य प्रदेश: Indore BJP Controversy भारतीय जनता पार्टी (BJP) की इंदौर इकाई एक बार फिर विवादों में है। नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा द्वारा घोषित नई नगर कार्यकारिणी में स्वाति कासिद को ‘नगर मंत्री’ बनाए जाने का फैसला पार्टी के लिए सिरदर्द बन गया है।
विवाद इसलिए गहराया है क्योंकि स्वाति कुख्यात अपराधी युवराज कासिद उर्फ युवराज उस्ताद की पत्नी हैं, जिन पर हत्या, वसूली और गैंगस्टर एक्ट जैसे गंभीर मामले दर्ज रह चुके हैं।


Indore BJP Controversy: गैंगस्टर की पत्नी स्वाति कासिद को ‘नगर मंत्री’ बनाना पड़ा भारी
Indore BJP Controversy: गैंगस्टर की पत्नी स्वाति कासिद को ‘नगर मंत्री’ बनाना पड़ा भारी

🔹 9 महीने बाद जारी हुई विवादित कार्यकारिणी

सुमित मिश्रा ने अध्यक्ष पद संभालने के करीब 9 महीने बाद नई 33 सदस्यीय नगर कार्यकारिणी घोषित की।
टीम में 8 उपाध्यक्ष, 3 महामंत्री और 8 मंत्री शामिल हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा स्वाति कासिद की नियुक्ति को लेकर है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह नियुक्ति भाजपा की घोषित “Zero Tolerance Policy” के खिलाफ जाती है, जिसके तहत पार्टी अपराध से जुड़े लोगों को कोई पद नहीं देने का दावा करती रही है।


🔹 कौन हैं स्वाति कासिद और क्यों है विवाद?

स्वाति कासिद का नाम इंदौर की राजनीति में नया नहीं है।
उनके पति युवराज कासिद पर हत्या, अवैध वसूली, धमकी, संगठित अपराध और गैंगस्टर एक्ट (NSA) जैसे मामलों में कार्रवाई हो चुकी है।
हालांकि वह एक हत्या केस में बरी हो चुके हैं, लेकिन STF और क्राइम ब्रांच ने उन्हें कई बार गिरफ्तार किया है।
2020 में उन्हें रासुका के तहत जेल भेजा गया था।

इस पृष्ठभूमि के बावजूद भाजपा ने स्वाति को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देना कई लोगों को अखर रहा है।


🔹 भाजपा का पलटा रुख: 16 घंटे में टिकट रद्द, अब पदोन्नति

2022 के नगर निगम चुनावों में स्वाति को वार्ड 56 से पार्षद प्रत्याशी बनाया गया था, लेकिन जैसे ही उनके पति की पृष्ठभूमि चर्चा में आई, भाजपा ने 16 घंटे में उनका टिकट रद्द कर दिया
उस समय तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष वी.डी. शर्मा ने कहा था —

“भाजपा किसी भी आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति या उनके परिजनों को पद नहीं देती। हमारी नीति है ‘Zero Tolerance’।”

अब उसी व्यक्ति को नगर मंत्री बनाए जाने से भाजपा के अंदर और बाहर दोनों जगह सवाल उठने लगे हैं।


🔹 लापरवाही और संगठनात्मक गड़बड़ियां

विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ।
जारी की गई कार्यकारिणी सूची में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का नाम गलत लिखा गया — ‘खंडेलवा’
सूची में कई अन्य वर्तनी गलतियां भी हैं, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराज़गी और असंतोष बढ़ गया है।
कुछ कार्यकर्ताओं ने इसे “भारी लापरवाही और जल्दबाजी में किया गया फैसला” बताया।


🔹 विपक्ष का पलटवार और सोशल मीडिया पर आलोचना

इस नियुक्ति ने विपक्ष को भाजपा पर हमला बोलने का बड़ा मौका दे दिया है।
कांग्रेस ने इसे “भाजपा की दोहरी नीति” बताते हुए कहा कि पार्टी बाहर से नैतिकता की बात करती है, लेकिन भीतर से अपराधियों को संरक्षण देती है।
सोशल मीडिया पर भी #IndoreBJP, #SwatiKasid, और #ZeroTolerancePolicy जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
कई यूजर्स ने इसे “राजनीति और अपराध के गठजोड़” का ताजा उदाहरण बताया है।


🔹 राजनीतिक प्रभाव और आगे की राह

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह विवाद भाजपा की छवि और विश्वसनीयता दोनों पर असर डाल सकता है — खासकर इंदौर जैसे शहर में, जिसे भाजपा का गढ़ माना जाता है।
अगर पार्टी ने जल्द इस पर सफाई नहीं दी, तो यह मामला प्रदेश स्तर पर भी बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।

इंदौर भाजपा का यह फैसला पार्टी की संगठनात्मक पारदर्शिता और नैतिक प्रतिबद्धता दोनों पर सवाल उठाता है।
स्वाति कासिद की नियुक्ति ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि —

क्या सत्ता की राजनीति में नैतिकता अब सिर्फ एक चुनावी नारा बनकर रह गई है?
भाजपा को अब अपने कार्यकर्ताओं और जनता के बीच इस फैसले का ठोस जवाब देना होगा, वरना यह विवाद पार्टी की “साफ-सुथरी राजनीति” की छवि पर लंबा साया डाल सकता है।

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