CWC 2025: छतरपुर की बेटी क्रांति गौड़ ने इतिहास रचने के बाद क्या बोला |भारत ने जीता पहला महिला क्रिकेट विश्व कप
CWC 2025: छतरपुर की बेटी क्रांति गौड़ का इतिहास रचने वाला प्रदर्शन, गांव की गलियाँ खुशियों से भर उठीं।
भारत ने ICC महिला क्रिकेट विश्व कप 2025 में एक ऐसा इतिहास रच दिया, जिसे हर भारतीय आने वाले वर्षों तक गर्व से याद करेगा। फाइनल मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका को 52 रनों से हराते हुए भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने पहली बार यह महत्त्वपूर्ण खिताब अपने नाम किया। इस शानदार जीत में एक नाम सबसे अधिक चर्चा में रहा — मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले की तेज गेंदबाज क्रांति गौड़।
उनके बेहतरीन स्पेल, सटीक गेंदबाजी और निरंतर आत्मविश्वास ने भारत को फाइनल तक पहुंचाने और खिताब दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई। विश्व कप जीतते ही न सिर्फ देशभर में जश्न मना, बल्कि छतरपुर के घुवारा गांव में खुशी की लहर दौड़ गई।
क्रांति गौड़: मिट्टी की खुशबू से मैदान की चमक तक
क्रांति गौड़ का सफर आसान नहीं रहा। वे एक साधारण आदिवासी परिवार से आती हैं, जहां रोजमर्रा की जरूरतें ही बड़ी चुनौती थीं। आर्थिक परिस्थितियाँ कमजोर थीं, लेकिन क्रिकेट के प्रति जुनून कमाल का था।
- उन्होंने बचपन में गांव के खाली मैदानों में नंगे पैर क्रिकेट खेलना शुरू किया
- घर की आर्थिक स्थिति खराब हो गई जब पिता की नौकरी चली गई
- परिवार ने क्रांति के प्रशिक्षण के लिए गहने गिरवी रखे
- कई बार खर्च न होने के कारण टूर्नामेंट में नहीं जा पाई
- लेकिन हार नहीं मानी — दिन-रात मेहनत जारी रखी
और आज उसी मेहनत, तपस्या और लगन ने क्रांति को भारत की महिला टीम की तेज गेंदबाज के रूप में दुनिया में पहचान दिलाई।

CWC 2025 में शानदार प्रदर्शन
क्रांति गौड़ ने पूरे टूर्नामेंट में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया।
उन्होंने कुल 9 विकेट झटके, जिनमें कई बड़े विकेट शामिल थे।
| मैच | ओवर | विकेट | हाइलाइट |
|---|---|---|---|
| सेमीफाइनल बनाम ऑस्ट्रेलिया | 10 ओवर | 2 विकेट | एलिसा हीली का महत्वपूर्ण विकेट |
| भारत बनाम पाकिस्तान | 8 ओवर | 3 विकेट | “प्लेयर ऑफ द मैच” अवार्ड |
| फाइनल बनाम दक्षिण अफ्रीका | 9 ओवर | 2 विकेट | शुरुआती विकेट लेकर मैच को भारत की ओर मोड़ा |
उनकी लाइन-लेंथ, स्पीड और दबाव में शांत रहने की क्षमता भारतीय टीम के लिए बड़ी ताकत साबित हुई।

गांव में खूब मना जश्न
जैसे ही टीवी पर भारत की जीत का क्षण आया —
घुवारा गांव की गलियाँ खुशियों से भर उठीं।
- ढोल-नगाड़ों की आवाजें
- पटाखों की चमक
- मिठाइयाँ बांटते लोग
- घर पर बधाइयों का तांता
क्रांति के पिता की आँखों में गर्व के आँसू थे।
माता ने कहा — “हमारी बेटी ने पूरे देश का नाम रोशन किया है।”
उनकी बहन रोशनी ने बताया,
“क्रांति हमेशा कहती थी — मैं देश के लिए खेलूंगी, और आज वह सपना सच हो गया।”
क्रांति गौड़ की कहानी सिर्फ क्रिकेट की कहानी नहीं है।
यह कहानी है —
✔ संघर्ष की
✔ विश्वास की
✔ और सपनों को सच करने की
उन्होंने यह साबित किया कि:
अगर दिल में जुनून हो, तो कोई परिस्थिति बड़ी नहीं होती।
उनकी सफलता ने न सिर्फ छतरपुर बल्कि पूरे मध्य प्रदेश और देश में युवा खिलाड़ियों को नई उम्मीद दी है।
जितने के बाद देखो कैसे टीम इंडिया ने मनाया जश्न