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Bhopal Teen Talaq Case : भोपाल में बच्चा न होने पर पति ने दिया तीन तलाक, महिला ने हिम्मत दिखाकर दर्ज कराया केस | जानें पूरा मामला

भोपाल में बच्चा न होने पर पति ने दिया तीन तलाक, महिला ने हिम्मत दिखाकर दर्ज कराया केस | जानें पूरा मामला

भोपाल में महिला ने पति पर बच्चा न होने पर तीन तलाक देने का आरोप लगाया। पीड़िता ने पति और ससुराल वालों के खिलाफ FIR दर्ज कराई। जानें पूरा मामला और क्या कहता है कानून।


भोपाल, मध्य प्रदेश। राजधानी से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है जहां एक महिला को सिर्फ इसलिए तीन तलाक दे दिया गया क्योंकि वह बच्चा पैदा नहीं कर पाई। पीड़िता ने इस प्रताड़ना के खिलाफ आवाज उठाई और महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

कहां का है मामला?

मामला भोपाल के लटेरी थाना क्षेत्र का बताया गया है। 53 वर्षीय पीड़ित महिला की शादी साल 2007 में विदिशा निवासी कययुम खान से हुई थी। शुरुआती वर्षों में सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन समय बीतने के साथ पति और ससुराल वालों ने बच्चा न होने को लेकर महिला को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।

 


पीड़िता के आरोप – वर्षों तक झेले जुल्म

पीड़िता ने बताया कि शादी के कुछ समय बाद ही उसके पति का व्यवहार बदलने लगा।
महिला के अनुसार:

महिला ने बताया कि उसने सालों तक ये प्रताड़ना सहन की, इस उम्मीद में कि शायद समय के साथ सब ठीक हो जाएगा। लेकिन हालात और ज्यादा बिगड़ते गए।


तीन तलाक कैसे दिया गया?

कुछ दिन पहले पति ने घर में फिर विवाद किया। महिला ने अपने मायके वालों को बुलाया ताकि स्थिति संभले। लेकिन इसके विपरीत, पति ने सभी के सामने जोर से तीन बार ‘तलाक-तलाक-तलाक’ कहकर रिश्ता खत्म कर दिया।

यह घटना सार्वजनिक रूप से हुई, जिससे महिला टूट गई। लेकिन हार मानने के बजाय उसने कानूनी रास्ता चुना।


पुलिस ने क्या कार्रवाई की?

पीड़िता की शिकायत पर महिला थाना पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और:

जांच अधिकारी एसआई मोनिका कुशवाह ने कहा:

“मामला गंभीर है। तीन तलाक देना भारत में गैरकानूनी है। हमने FIR दर्ज कर ली है और आरोपी की गिरफ्तारी की प्रक्रिया जारी है। पीड़िता को हर संभव कानूनी मदद उपलब्ध कराई जाएगी।”


क्या कहता है कानून? | Three Talaq in India

भारत में तीन तलाक देना 2019 से अपराध है।
सupreme Court और संसद ने इसे असंवैधानिक करार दिया है।

कानूनी प्रावधान:

यह कानून महिलाओं को समान अधिकार प्रदान करता है और धार्मिक आड़ में होने वाले उत्पीड़न पर रोक लगाता है।


समाज के लिए संदेश

यह मामला सिर्फ एक महिला का नहीं, बल्कि समाज की उन महिलाओं की आवाज है जो चुपचाप दर्द सहती रहती हैं।
पीड़िता ने हिम्मत दिखाकर कानून का सहारा लिया, जो अन्य महिलाओं को भी यह संदेश देता है कि चुप रहना समाधान नहीं है।


निष्कर्ष

यह घटना फिर एक बार यह बताती है कि महिलाओं को अपने अधिकारों की जानकारी होना बेहद जरूरी है।
कानून उनके साथ है, बस जरूरत है आवाज उठाने की।
समाज को भी ऐसे मामलों पर संवेदनशील और जागरूक होना चाहिए ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।


 

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