भोपाल में शुरू हुआ ‘QR कोड हाइवे’: अब सड़क स्कैन करते ही मिलेगी इंजीनियर-ठेकेदार की पूरी जानकारी | Bhopal QR Code Road System
भोपाल में पहली बार ‘QR कोड हाइवे’ की शुरुआत। स्मार्टफोन से सड़क का QR कोड स्कैन करते ही सड़क निर्माण तारीख, इंजीनियर, ठेकेदार, वारंटी और शिकायत नंबर की जानकारी मिलेगी। जानें पूरी खबर और इसके फायदे।

भोपाल: देश का पहला ‘QR कोड हाइवे’ लॉन्च! स्कैन करते ही मिलेगी सड़क की पूरी रिपोर्ट – इंजीनियर, ठेकेदार और वारंटी तक की जानकारी
भोपाल, मध्य प्रदेश।
राजधानी भोपाल अब स्मार्ट सिटी से एक कदम आगे बढ़ चुकी है। शहर में पहली बार ऐसा सिस्टम लागू किया गया है, जिसमें सड़क की स्थिति, निर्माण एजेंसी, जिम्मेदार इंजीनियर और ठेकेदार की जानकारी सिर्फ एक QR कोड स्कैन करके तुरंत मिल जाएगी। इस अनोखी पहल को आम जनता की सुविधा और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। इसे कई लोग “QR Code Highway Project”, “Digital Road Management System” और “Smart Road Transparency Initiative” के नाम से भी टैग कर रहे हैं।
क्या है भोपाल का ‘QR कोड हाइवे’ प्रोजेक्ट?
नगर निगम भोपाल और लोक निर्माण विभाग (PWD) ने मिलकर शहर की सड़कों पर अलग-अलग जगहों पर विशेष बोर्ड लगाए हैं, जिन पर एक यूनिक QR कोड छपा हुआ है।
यह QR कोड उस सड़क का डिजिटल आधार कार्ड (Road Digital ID) की तरह काम करेगा।
स्कैन करते ही मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई देगी—
✅ सड़क का नाम
✅ सड़क की लंबाई-चौड़ाई
✅ निर्माण की तारीख
✅ वारंटी और गारंटी अवधि
✅ जिम्मेदार PWD / नगर निगम इंजीनियर का नाम, पद और मोबाइल
✅ सड़क बनाने वाले ठेकेदार का नाम और संपर्क
✅ सड़क निर्माण लागत
✅ शिकायत दर्ज करने का नंबर
✅ लाइव शिकायत स्टेटस (Coming Soon)
यह सिस्टम इंडिया में पहली बार इतने व्यापक स्तर पर लागू किया गया है।
यह QR सिस्टम कैसे काम करता है? – स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस
1️⃣ सड़क किनारे लगे बोर्ड पर QR कोड देखें
2️⃣ अपने मोबाइल कैमरे या QR स्कैनर ऐप से स्कैन करें
3️⃣ तुरंत एक वेबपेज खुलेगा जिसमें सड़क की पूरी प्रोफ़ाइल होगी
4️⃣ गड्ढे, टूट-फूट या पानी भराव की शिकायत उसी पेज से दर्ज कर सकते हैं
5️⃣ शिकायत सीधे जिम्मेदार अधिकारी के पास जाएगी
यह प्रक्रिया बिल्कुल आसान है और किसी ऐप को डाउनलोड करने की आवश्यकता नहीं है।
यह योजना क्यों शुरू की गई? उद्देश्य क्या हैं?
मध्य प्रदेश सरकार ने इस प्रोजेक्ट को लागू करते समय 4 बड़े उद्देश्य तय किए हैं—
पारदर्शिता (Transparency in Road Construction)
अब नागरिकों को पता होगा कि सड़क किस ठेकेदार ने बनाई और किस इंजीनियर की निगरानी में काम हुआ।
जवाबदेही (Accountability of Engineers & Contractors)
सड़क टूटने पर अधिकारी बहाना नहीं बना पाएंगे।
लोग सीधे जिम्मेदार अधिकारी को कॉल कर सकते हैं।
शिकायत निवारण आसान (Easy Complaint System)
पहले लोग शिकायत कहां और कैसे करें—यह पता लगाने में ही परेशान हो जाते थे।
अब सिर्फ QR कोड स्कैन करके शिकायत दर्ज हो जाएगी।
नागरिकों की भागीदारी (Citizen Participation in Governance)
जनता अब सड़क की गुणवत्ता की निगरानी खुद कर सकेगी।
शहर के विकास में सीधी भागीदारी बढ़ेगी।
नागरिकों को क्या बड़े फायदे होंगे?
✔ गड्ढों से छुटकारा जल्दी
शिकायत सीधे जिम्मेदार इंजीनियर तक पहुंचेगी, जिससे मरम्मत तुरंत होगी।
✔ सड़क निर्माण का पूरा हिसाब सामने
लोग अब जान पाएंगे कि रोड कब बनी, किसने बनाई और इसकी वारंटी कब खत्म होती है।
✔ भ्रष्टाचार पर लगाम
क्योंकि हर जानकारी सार्वजनिक होगी, ठेकेदार खुलेआम घटिया काम नहीं कर पाएंगे।
✔ लोकेशन आधारित सेवा
हर सड़क पर अलग QR कोड—मतलब जानकारी 100% सटीक और लोकेशन आधारित होगी।
प्रशासन के लिए क्या फायदे?
✔ शिकायत ट्रैकिंग आसान
✔ बजट और रोड क्वालिटी का डिजिटल रिकॉर्ड
✔ इंजीनियरों की निगरानी बेहतर
✔ समय पर मरम्मत और काम की गति में सुधार
भविष्य में और क्या जुड़ने वाला है?
सरकार इस प्रोजेक्ट को पहलेभोपाल में लागू कर रही है, लेकिन आगे इसे—
✅ इंदौर
✅ ग्वालियर
✅ जबलपुर
✅ उज्जैन
जैसे बड़े शहरों में भी शुरू करने का प्रस्ताव है।
भविष्य में इसमें ये फीचर्स भी जोड़ने की योजना है—
• सड़क की रीयल-टाइम फोटो
• कार्य प्रगति रिपोर्ट
• ड्रोन सर्वे का डेटा
• ऑनलाइन फीडबैक सिस्टम
इससे पूरा मध्य प्रदेश डिजिटल रोड ट्रांसपेरेंसी सिस्टम की तरफ बढ़ेगा।
निष्कर्ष
भोपाल का QR कोड हाइवे प्रोजेक्ट भारत में सड़क पारदर्शिता के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम है। यह ना सिर्फ नागरिकों की समस्या कम करेगा बल्कि सरकारी कामकाज को भी प्रभावी और जिम्मेदार बनाएगा।
तकनीक का यह उपयोग साबित करता है कि स्मार्ट सिटी का मतलब सिर्फ इमारतें और लाइटें नहीं, बल्कि स्मार्ट गवर्नेंस भी है।