भोपाल के जेपी अस्पताल में दिव्यांग मरीजों को 4 घंटे तक इंतजार करवाए जाने का मामला सामने आया है। डॉक्टरों और प्रशासन की लापरवाही ने स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को उजागर कर दिया। जानें पूरा मामला।
भोपाल जेपी अस्पताल में दिव्यांगों के साथ लापरवाही, डॉक्टरों ने चार घंटे करवाया इंतजार | स्वास्थ्य सेवाओं की सच्चाई सामने
भोपाल, मध्य प्रदेश। राजधानी के जयप्रकाश (जेपी) अस्पताल में सोमवार को दिव्यांग मरीजों के साथ हुए व्यवहार ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्थि बाधित (Orthopedic Disability) मरीजों के लिए लगाए गए विशेष कैंप में डॉक्टरों और कर्मचारियों की अनुपस्थिति ने दिव्यांगों को घंटों तक असहाय स्थिति में इंतजार करने पर मजबूर किया।
क्या था पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, जेपी अस्पताल में सोमवार को फिजियोथैरेपी विभाग में अस्थि बाधित दिव्यांगों के लिए दिव्यांगता प्रमाणपत्र (Disability Certificate) जारी करने का कैंप आयोजित किया गया था। मरीजों को सुबह 9 बजे अस्पताल आने का समय दिया गया था।
लेकिन जब दिव्यांगजन समय पर अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ का कहीं अता-पता नहीं था।
अस्पताल में लगे बोर्ड के अनुसार:
- फॉर्म वितरण: सुबह 9:30 से दोपहर 12:30 बजे तक
- चिकित्सा जांच और प्रमाणन: निर्धारित समय में पूरा होना था
लेकिन हकीकत में डॉक्टर करीब दोपहर 1 बजे पहुंचे, यानी करीब चार घंटे की देरी।
इस दौरान कई मरीज व्हीलचेयर और बैसाखियों के सहारे खुले बरामदे में बिना सुविधा के बैठे रहे।

दिव्यांग मरीजों में नाराज़गी
दिव्यांग नागरिकों का कहना है कि यह पहली बार नहीं, बल्कि लगातार चलती आ रही समस्या है।
भोपाल निवासी राजकुमार सिंह, जो व्हीलचेयर पर आए थे, बोले:
“हम सुबह से बैठे हैं। हमें कोई पूछने वाला नहीं। दिव्यांगों के लिए समय और सुविधा की बात तो होती है, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं होता। हर बार हमें ऐसे ही इंतजार करवाया जाता है।”
वहीं जीवन कोरी, जिनके दोनों पैर दिव्यांग हैं, ने बताया:
“मैं अपनी दिव्यांगता कार्ड में जन्मतिथि सुधारने आया था। कर्मचारियों ने कहा डॉक्टर आएंगे तब होगा। हम घंटों से बैठे हैं। यह हमारी मजबूरी है, इसलिए हमें चुप रहना पड़ता है।”
हर दिन की समस्या
मरीजों ने बताया कि अस्पताल में प्रतिदिन अलग-अलग श्रेणी के दिव्यांगों के लिए कैंप लगते हैं, लेकिन:
- डॉक्टर मीटिंग में होने के कारण देर से आते हैं
- स्टाफ की कमी और बदइंतजामी होती है
- दिव्यांगों के लिए विशेष सहायता सुविधाओं का अभाव है
- व्हीलचेयर रैंप और मार्ग में भी कई जगह बाधाएं हैं
यानी जो अस्पताल दिव्यांगों के लिए सेवा देने वाला है, वही उन्हें परेशान करने का कारण बन गया है।
अस्पताल प्रशासन का बयान
इस मामले में अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. संजय जैन ने कहा:
“आज मंत्री जी के साथ महत्वपूर्ण बैठक थी, उसी वजह से डॉक्टरों के पहुंचने में देरी हुई होगी। हम दिव्यांग मरीजों की सुविधा का ध्यान रखते हैं और सभी डॉक्टरों को समय पर उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।”
लेकिन उनका यह बयान मरीजों की पीड़ा और इंतजार का समाधान नहीं कर पाया।
भोपाल जेपी अस्पताल की यह घटना दिखाती है कि दिव्यांग मरीजों के लिए संवेदना सिर्फ कागजों तक सीमित है।
जो मरीज पहले से संघर्ष कर रहे हैं, उन्हें सम्मान, समय और सुविधा मिलना चाहिए, लेकिन इसके उलट उन्हें बेबस और असहाय बनाया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग को:
- डॉक्टर और स्टाफ की समय अनुशासन प्रणाली सख्त करनी होगी
- दिव्यांगों के लिए विशेष प्रोटोकॉल लागू करना होगा
- शिकायतें आने पर तुरंत कार्रवाई और जवाबदेही तय करनी होगी