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bhopal elder suicide domestic harassment case: बहू की प्रताड़ना से तंग आकर बुजुर्ग ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में लिखा “अब नहीं सह सकता”

भोपाल  घरेलू उत्पीड़न मामला: बहू की प्रताड़ना से तंग आकर बुजुर्ग ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में लिखा “अब नहीं सह सकता”

भोपाल |bhopal elder suicide domestic harassment caseBhopalSuicideCase
| 30 अक्टूबर 2025 

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। न्यू मिनाल रेजीडेंसी इलाके में 62 वर्षीय रमेश चंद्र गुप्ता ने कथित रूप से घरेलू उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली।
पुलिस को मौके से मिला पांच पन्नों का सुसाइड नोट, जिसमें मृतक ने अपनी बहू पर शारीरिक और मानसिक यातना देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस घटना ने एक बार फिर समाज में बुजुर्गों के अधिकार और सम्मान पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।

bhopal elder suicide domestic harassment case: बहू की प्रताड़ना से तंग आकर बुजुर्ग ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में लिखा “अब नहीं सह सकता”
bhopal elder suicide domestic harassment case: बहू की प्रताड़ना से तंग आकर बुजुर्ग ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में लिखा “अब नहीं सह सकता”

🔹 सुसाइड नोट में क्या लिखा था?

अयोध्या नगर पुलिस के अनुसार, सुसाइड नोट में रमेश चंद्र गुप्ता ने लिखा है कि उनकी बहू पिछले कई सालों से उनके साथ दुर्व्यवहार कर रही थी।
नोट में उल्लेख है कि बहू उन्हें “जली हुई रोटियां और पानी मिली सब्ज़ी” देती थी, और परिवार में जानबूझकर उनका अपमान किया जाता था।
उन्होंने लिखा —

“अब यह अपमान मुझसे सहा नहीं जाता… बहू की प्रताड़ना ने जीना मुश्किल कर दिया है।”


🔹 कानूनी विवादों में फंसा था परिवार

पुलिस जांच में सामने आया कि गुप्ता परिवार पिछले कुछ वर्षों से कानूनी और पारिवारिक विवादों में उलझा हुआ था।
रमेश गुप्ता का बेटा पुष्पेंद्र, अपनी पत्नी (आरोपी बहू) से तलाक का केस लड़ रहा है।
वहीं बहू ने भी ससुराल पक्ष के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और मेंटेनेंस (गुजारा भत्ता) के मामले दर्ज कराए थे।
इन झगड़ों के कारण घर का माहौल तनावपूर्ण बना हुआ था और इसी ने बुजुर्ग को मानसिक रूप से तोड़ दिया।


🔹 पुलिस ने शुरू की जांच

अयोध्या नगर थाना पुलिस ने मृतक का सुसाइड नोट बरामद कर जांच शुरू कर दी है।
एसीपी मनीष भारद्वाज ने बताया —

“सुसाइड नोट की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। इसमें लिखे हर बयान की पुष्टि के लिए परिजनों से पूछताछ जारी है।”
पुलिस फिलहाल बहू से पूछताछ की तैयारी में है और मामले के हर कानूनी पहलू को ध्यान में रखते हुए जांच आगे बढ़ा रही है।


🔹 बुजुर्गों के खिलाफ बढ़ते घरेलू अपराधों पर चिंता

इस घटना ने एक बार फिर समाज में बुजुर्गों के खिलाफ घरेलू हिंसा और मानसिक उत्पीड़न जैसे मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया है।
भारत में हर साल हजारों बुजुर्ग अपने ही परिवार के सदस्यों द्वारा किए गए अत्याचारों का सामना करते हैं, लेकिन उनमें से अधिकांश मामले रिपोर्ट तक नहीं होते।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में समाज को आगे आकर पीड़ितों को सहायता, परामर्श और कानूनी मदद उपलब्ध करानी चाहिए।


🔹 निष्कर्ष

रमेश चंद्र गुप्ता की आत्महत्या केवल एक पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि हमारे समाज के नैतिक पतन और संवेदनहीनता की दर्दनाक मिसाल है।
जब परिवार का सबसे अनुभवी सदस्य ही अपनों की बेरुखी से हार मान ले, तो यह पूरे समाज के लिए आत्ममंथन का समय है।
पुलिस जांच से सच सामने आने की उम्मीद है, लेकिन इससे ज़्यादा ज़रूरी है कि समाज अपने बुजुर्गों के प्रति सम्मान और सहानुभूति की भावना को फिर से जीवित करे।


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