भिंड: छात्राओं को अश्लील वीडियो दिखाकर , छेड़खानी करने वाला शिक्षक गिरफ्तार, शिक्षा विभाग ने किया निलंबित
Bhind News, mp news today- Bhind M.P Teacher CaseBhind Teacher Case | 31 अक्टूबर 2025
मध्य प्रदेश के भिंड जिले में शिक्षा जगत को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। सरकारी स्कूल के शिक्षक रामेंद्र सिंह कुशवाहा को छात्राओं से छेड़खानी और अश्लील वीडियो दिखाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। शिक्षा विभाग ने भी शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

घटना का खुलासा कैसे हुआ?
यह मामला तब सामने आया जब स्कूल की कुछ छात्राओं ने अचानक कक्षाओं में आना बंद कर दिया। कई दिनों तक स्कूल न आने पर अभिभावकों को शक हुआ और जब उन्होंने बच्चियों से बात की, तो पूरा मामला खुल गया।
छात्राओं ने बताया कि उनका शिक्षक, रामेंद्र सिंह, कक्षा के दौरान अपने मोबाइल फोन से अश्लील वीडियो दिखाता था और उनके साथ अमर्यादित व्यवहार करता था। विरोध करने पर वह उन्हें डराने-धमकाने लगा और किसी को कुछ न बताने की चेतावनी दी।
इस डर के कारण छात्राओं ने स्कूल जाना छोड़ दिया। परिजनों ने जब यह सुना तो वे तुरंत स्कूल प्रशासन के पास पहुंचे, लेकिन जब वहाँ कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो मामला देहात थाने तक पहुंच गया।
एफआईआर और पुलिस कार्रवाई
देहात थाना प्रभारी मुकेश शाक्य ने बताया कि आरोपी शिक्षक के खिलाफ POCSO एक्ट, SC/ST एक्ट और भारतीय दंड संहिता (IPC) की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस ने आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है।
पुलिस ने कहा कि —
“हम इस मामले को बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर अपराध मानते हैं। पीड़ित छात्राओं के बयान दर्ज किए जा चुके हैं और मेडिकल जांच भी कराई जा रही है।”
शिक्षा विभाग की सख्त कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलते ही जिला शिक्षा अधिकारी ने आरोपी शिक्षक रामेंद्र सिंह कुशवाहा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
विभाग ने कहा कि “ऐसे शिक्षक जो शिक्षा के मंदिर को कलंकित करते हैं, उन्हें किसी भी परिस्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।”
साथ ही विभागीय जांच का आदेश भी जारी किया गया है ताकि इस पूरे मामले की गहराई से जांच की जा सके।
शिक्षा संस्थानों की सुरक्षा पर सवाल
इस घटना ने फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या ठोस इंतज़ाम हैं?
शिक्षक, जिन्हें समाज में सबसे सम्मानित माना जाता है, जब इस तरह के अपराधों में लिप्त पाए जाते हैं, तो पूरा सिस्टम सवालों के घेरे में आ जाता है।
अभिभावकों का कहना है कि अब बच्चों को स्कूल भेजने से पहले सौ बार सोचना पड़ता है।
समाज के लिए चेतावनी और सबक
यह घटना न केवल भिंड बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक चेतावनी है।
यह ज़रूरी है कि स्कूलों में “Child Protection Policy” को सख्ती से लागू किया जाए और हर शिक्षक का व्यवहारिक मूल्यांकन (Background Check) समय-समय पर किया जाए।
साथ ही, बच्चों को भी यह सिखाना जरूरी है कि अगर कोई उन्हें अनुचित रूप से छुए या गलत व्यवहार करे तो वे बिना डरे तुरंत इसकी शिकायत करें।
भिंड का यह मामला समाज और शिक्षा प्रणाली के लिए एक गहरी चोट की तरह है।
जहाँ शिक्षक का कर्तव्य ज्ञान देना और सुरक्षा देना है, वहीं कुछ लोग इस जिम्मेदारी को कलंकित कर रहे हैं।
अब यह जरूरी है कि इस केस में आरोपी को सख्त सजा मिले ताकि भविष्य में कोई शिक्षक या कर्मचारी ऐसा करने की हिम्मत न करे।