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AIIMS भोपाल में विवाद: महिला डॉक्टर ने विभाग प्रमुख पर उत्पीड़न का आरोप, ICC में जांच जारी

AIIMS भोपाल में विवाद: महिला डॉक्टर ने विभाग प्रमुख पर उत्पीड़न का आरोप, ICC में जांच जारी

भोपाल।
देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान एम्स भोपाल (AIIMS Bhopal) में एक गंभीर मामला सामने आया है। ट्रॉमा और इमरजेंसी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. श्रुति दुबे ने अपने विभागाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद यूनुस पर उत्पीड़न, धमकाने और अपमानजनक व्यवहार के आरोप लगाए हैं। यह मामला अब संस्थान की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के पास पहुंच चुका है, जिसने जांच शुरू कर दी है।

AIIMS Bhopal
AIIMS Bhopal

 


⚖️ महिला डॉक्टर ने लगाए ये गंभीर आरोप

डॉ. श्रुति दुबे का कहना है कि उन्हें लगातार मानसिक उत्पीड़न और कार्यस्थल पर असुरक्षित माहौल का सामना करना पड़ा। उनके मुताबिक,

डॉ. दुबे का आरोप है कि यह सब जानबूझकर किया गया ताकि उन्हें मानसिक रूप से तोड़ा जा सके और मजबूर होकर इस्तीफा देना पड़े।


🕒 मामले की शुरुआत: 7 अगस्त 2025 को हुआ विवाद

रिपोर्ट के अनुसार, विवाद की शुरुआत 7 अगस्त 2025 की सुबह हुई, जब डॉ. यूनुस ने डॉ. दुबे का तबादला आईसीयू से ट्रॉमा विभाग में करने का आदेश जारी किया।

घटना के बाद डॉ. दुबे ने इसे लिखित रूप में AIIMS प्रशासन और ICC समिति को रिपोर्ट किया।


💬 डॉ. श्रुति दुबे का बयान

डॉ. दुबे ने मीडिया को बताया कि यह मामला सिर्फ व्यक्तिगत नहीं बल्कि कार्यस्थल पर सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा है।

“मुझे लगातार धमकाया जा रहा था। मीटिंग में अपमानित किया गया। मानसिक दबाव इतना बढ़ गया कि मेरा काम प्रभावित होने लगा। अगर माहौल सुरक्षित नहीं हुआ, तो मुझे इस्तीफा देना पड़ सकता है।”

उन्होंने कहा कि एक डॉक्टर के रूप में वे चाहती हैं कि संस्थान में समान व्यवहार और पारदर्शिता बनी रहे ताकि अन्य महिला कर्मचारियों को भी हिम्मत मिले।


🧑‍⚕️ डॉ. मोहम्मद यूनुस का पक्ष

वहीं, विभागाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद यूनुस ने इन सभी आरोपों से साफ इनकार किया है।
उनका कहना है कि उन्होंने किसी भी तरह का अनुचित व्यवहार नहीं किया, और सभी निर्णय विभागीय प्रक्रिया के तहत लिए गए।

“मैंने ICC समिति को पूरा जवाब दे दिया है। मेरे खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं और तथ्यों से परे हैं।” — डॉ. मोहम्मद यूनुस


🏛️ AIIMS प्रशासन ने शुरू की आंतरिक जांच

AIIMS भोपाल प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसे आंतरिक शिकायत समिति (ICC) को सौंपा है।

AIIMS के प्रवक्ता ने बताया कि संस्थान में किसी भी प्रकार के यौन उत्पीड़न या कार्यस्थल पर दुर्व्यवहार के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाती है।


🧠 पृष्ठभूमि: AIIMS में पहले भी हो चुके हैं विवाद

यह पहला मौका नहीं है जब एम्स भोपाल या अन्य केंद्रीय चिकित्सा संस्थानों में कार्यस्थल उत्पीड़न के आरोप सामने आए हों।
पिछले कुछ वर्षों में देश के कई एम्स परिसरों में वरिष्ठ डॉक्टरों द्वारा कनिष्ठ कर्मचारियों पर दबाव और दुर्व्यवहार के मामले दर्ज किए गए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाएं संस्थानों की कार्य संस्कृति और नेतृत्व शैली पर सवाल उठाती हैं।
डॉक्टरों के बीच आपसी सम्मान और संवाद की कमी से न केवल कर्मचारियों का मनोबल गिरता है बल्कि मरीजों की देखभाल की गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है।


📊 महिला डॉक्टरों के सामने बढ़ती चुनौतियाँ

देशभर के मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत महिला डॉक्टरों के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य माहौल अब भी एक बड़ी चुनौती है।
राष्ट्रीय महिला आयोग की रिपोर्ट (2025) के अनुसार:

AIIMS भोपाल का यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि प्रतिष्ठित संस्थानों में भी जवाबदेही और पारदर्शिता की जरूरत है।


🔎 जांच की अगली प्रक्रिया

ICC समिति अब सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर रही है।

AIIMS प्रशासन ने फिलहाल दोनों डॉक्टरों को अलग-अलग शिफ्ट में कार्य करने के निर्देश दिए हैं ताकि जांच निष्पक्ष रह सके।


💡 समाज और संस्थान के लिए सबक

यह मामला सिर्फ एक डॉक्टर और विभाग प्रमुख का विवाद नहीं है — यह सवाल उठाता है कि
क्या भारत के चिकित्सा संस्थानों में महिला कर्मचारियों को समान और सुरक्षित वातावरण मिल पा रहा है?
ऐसे मामलों से सीख लेते हुए जरूरी है कि:


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