जब निकला एक साधु तो मिला मुसलमान समाज का भी समर्थन |बागेश्वर धाम की हिंदू एकता पदयात्रा बनी सांप्रदायिक सद्भाव की नई मिसाल

बागेश्वर धाम की हिंदू एकता पदयात्रा को मुस्लिम समाज का समर्थन मिला। जानें यात्रा का उद्देश्य, मार्ग, संदेश और 80 करोड़ हिंदुओं की एकता की मुहिम।

बागेश्वर धाम की हिंदू एकता पदयात्रा को मिला मुस्लिम समाज का समर्थन, सांप्रदायिक सद्भाव की नई मिसाल

छतरपुर (मध्य प्रदेश): बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा शुरू की गई सनातन हिंदू एकता पदयात्रा इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है। खास बात यह है कि इस यात्रा को इस बार मुस्लिम समाज की ओर से भी समर्थन मिला है। यह समर्थन न केवल सामाजिक सौहार्द का उदाहरण है बल्कि यह इस बात का संदेश भी देता है कि देश की एकता किसी एक धर्म तक सीमित नहीं, बल्कि सबकी साझा जिम्मेदारी है।

यात्रा कब और कहां से?

यह पदयात्रा 7 नवंबर से 16 नवंबर 2025 तक चलेगी।
यात्रा दिल्ली से शुरू होकर हरियाणा और उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं ग्रामीण मार्गों से होते हुए वृंदावन पहुंचेगी।

  • कुल ग्राम पंचायतें: लगभग 422
  • कवर जनसंख्या: लगभग 5 करोड़ लोगों तक एकता का संदेश
  • समय अवधि: कुल 10 दिन
बागेश्वर धाम की हिंदू एकता पदयात्रा को मिला मुस्लिम समाज का समर्थन, सांप्रदायिक सद्भाव की नई मिसाल
बागेश्वर धाम की हिंदू एकता पदयात्रा को मिला मुस्लिम समाज का समर्थन, सांप्रदायिक सद्भाव की नई मिसाल

क्या है हिंदू एकता पदयात्रा का उद्देश्य?

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस यात्रा का मुख्य लक्ष्य हिंदू समाज के अंदर फैले जाति, वर्ग और प्रांत भेद को खत्म करना बताया है। उनका कहना है कि:

“हिंदू समाज संगठित होगा तो भारत मजबूत होगा। विभाजन और भेदभाव हमें कमजोर करता है।”

यात्रा के प्रमुख उद्देश्य:

उद्देश्य विवरण
जातिगत भेदभाव का अंत समाज में व्याप्त ऊंच-नीच की भावना को समाप्त करना।
धार्मिक-सामाजिक एकता सभी संप्रदायों और समुदायों को साथ जोड़ने का प्रयास।
युवा जागरूकता युवाओं को भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म और राष्ट्र सेवा की ओर प्रेरित करना।

मुस्लिम समाज ने क्यों दिया समर्थन?

इस यात्रा में फैज खान की अगुवाई में 300 से अधिक मुस्लिम भाई शामिल होंगे।
फैज खान का कहना है:

“यह यात्रा किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का प्रयास है। इसलिए हम इसका समर्थन करते हैं।”

मुस्लिम समर्थन के प्रमुख कारण:

  • यात्रा का उद्देश्य सांप्रदायिक वैमनस्य नहीं, बल्कि एकता है।
  • यात्रा में सर्वधर्म समभाव का संदेश दिया जा रहा है।
  • धार्मिक विभाजन से ऊपर उठकर राष्ट्र भक्ति और मानवता को प्राथमिकता दी जा रही है।

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इस अभियान को 80 करोड़ हिंदू जनमानस की एकता की लड़ाई बताते हैं।

इसके पीछे मुख्य तर्क:

  1. बहुसंख्यक होने पर भी हिंदू समाज बिखरा हुआ है।
  2. जाति और प्रांत आधारित राजनीति ने समाज को कमजोर किया है।
  3. सांस्कृतिक पहचान को बचाने और एकजुट रहने की आवश्यकता है।

शास्त्री जी के अनुसार:

“यह लड़ाई किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व, संस्कृति और एकता को सुरक्षित रखने की है।”


साथ ही यात्रा में कई और सुविधा का ध्यान रखा गया है

  • महिलाओं के लिए अलग व्यवस्था
  • यात्रा मार्ग में सीसीटीवी और सुरक्षा प्रबंध
  • किसी भी प्रकार के हथियार या उत्तेजक नारेबाज़ी की मनाही
  • यात्रियों से धर्म और समुदाय का सम्मान बनाए रखने की अपील

यह यात्रा अहिंसक, शांतिपूर्ण और सांस्कृतिक स्वरूप रखेगी।


इस यात्रा का सामाजिक महत्व

बिंदु महत्व
धर्मों के बीच दूरी कम होगी दोनों समुदायों के लोग एक-दूसरे के करीब आएंगे
नफरत की राजनीति को चुनौती प्रेम, संवाद और सह-अस्तित्व का संदेश
भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब को मजबूती सांस्कृतिक विरासत की रक्षा

यह पहली बार है जब किसी हिंदू धार्मिक यात्रा को मुस्लिम समाज से खुला समर्थन मिला है, जो इसे ऐतिहासिक बनाता है।

बागेश्वर धाम का कहना है की यह पदयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सौहार्द की एक बड़ी मिसाल बनकर उभर रही है।
यह संदेश देती है कि:

“धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन देश और इंसानियत एक है।”

 

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