मध्य प्रदेश का नक्शा बदलेगा: नया संभाग, 3 नए जिले और भोपाल में बढ़ेंगी 5 तहसीलें
भोपाल (एमपी न्यूज़)।
मध्य प्रदेश अपने 70वें स्थापना दिवस (1 नवंबर 2025) पर बड़ा प्रशासनिक बदलाव करने जा रहा है।
राज्य सरकार एक नया संभाग (Nimar Division) बनाने, तीन नए जिलों (New Districts) के गठन और राजधानी भोपाल में पांच नई तहसीलों को जोड़ने की तैयारी में है।
इस कदम से राज्य में प्रशासनिक कामकाज सुगम होगा और आम लोगों को सरकारी सेवाओं तक तेज़ और स्थानीय स्तर पर पहुँच मिलेगी।

क्या-क्या बदलेगा मध्य प्रदेश के नक्शे में?
1. नया संभाग — “निमाड़ संभाग” का गठन
- प्रस्तावित नया संभाग निमाड़ (Nimar Division) होगा।
- इसमें खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर और बड़वानी जिले शामिल किए जाएंगे।
- फिलहाल ये जिले इंदौर संभाग में आते हैं, जिससे प्रशासनिक दूरी अधिक हो जाती है।
- नया संभाग बनने से निमाड़ क्षेत्र के विकास, सिंचाई परियोजनाओं और ट्राइबल क्षेत्रों के प्रबंधन में तेजी आएगी।
प्रमुख लाभ:
- स्थानीय प्रशासन मजबूत होगा
- निवेश और औद्योगिक विकास को प्रोत्साहन
- किसानों और आदिवासी समुदाय को बेहतर पहुंच
2. तीन नए जिले — पिपरिया, बीना और सीहोरा (या सिरोंज)
राज्य सरकार द्वारा तीन नए जिलों के गठन पर गंभीर विचार किया जा रहा है:
- पिपरिया जिला (होशंगाबाद से अलग)
- बीना जिला (सागर से अलग)
- सीहोरा या सिरोंज जिला (जबलपुर या विदिशा से अलग)
इन इलाकों के लोग लंबे समय से स्वतंत्र जिला बनने की मांग कर रहे थे।
नए जिले बनने से विकास योजनाओं का विकेंद्रीकरण होगा और स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
संभावित फायदे:
- छोटे प्रशासनिक ढांचे से तेज़ काम
- जनता के लिए आसान सेवाएँ
- स्थानीय नेताओं को नया राजनीतिक आधार
3. भोपाल में पाँच नई तहसीलें
राजधानी भोपाल में वर्तमान में केवल तीन तहसीलें (हुजूर, बैरसिया, कोलार) हैं।
अब सरकार यहाँ पाँच नई तहसीलें जोड़ने की योजना बना रही है:
- टीटी नगर
- एमपी नगर
- गोविंदपुरा
- संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़)
- पुराना भोपाल
इससे नागरिकों को राजस्व, भूमि और प्रमाणपत्र कार्यों के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी।
बदलाव की वजह क्या है?
- प्रशासनिक सुविधा:
बड़े जिलों और संभागों का प्रबंधन कठिन होता है। छोटे प्रशासनिक इकाइयाँ काम को सरल बनाती हैं। - जनता की मांग:
कई क्षेत्रों से नए जिले बनाए जाने की आवाज़ें वर्षों से उठ रही हैं। - विकास की गति:
नए संभाग और जिले बनने से स्थानीय विकास योजनाओं का क्रियान्वयन तेजी से होगा।
- राज्य सरकार ने इसके लिए “प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग” गठित किया है।
- ड्रोन और सैटेलाइट सर्वेक्षण के जरिए सीमाएँ तय की जा रही हैं।
- दिसंबर 2025 तक सर्वे का काम पूरा करने का लक्ष्य है।
- सूत्रों के मुताबिक, बदलाव की घोषणा जनवरी 2026 के पहले हफ्ते में हो सकती है।
अन्य संभावित परिवर्तन
- मैहर और रीवा जिलों की सीमाएँ फिर से तय की जा सकती हैं।
- लगभग 25 जिलों में सीमांकन (Delimitation) की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।
- इससे राज्य की कुल प्रशासनिक इकाइयाँ 90+ जिलों तक पहुँच सकती हैं।
राज्य प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि —“70 साल पूरे होने पर यह बदलाव मध्य प्रदेश के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा। नए जिले और संभाग बनने से न केवल प्रशासनिक ढांचा मजबूत होगा, बल्कि क्षेत्रीय असंतुलन भी कम होगा।