भैरुंदा को जिला बनाने की मांग फिर तेज — लोग बोले, “विदिशा निगम बन सकता है तो हम जिला क्यों नहीं?”
सीहोर (मध्य प्रदेश) | अक्टूबर 2025
मध्य प्रदेश में भैरुंदा को जिला बनाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है।
सीहोर जिले के इस क्षेत्र में लोगों का कहना है कि अगर विदिशा को नगर निगम बनाया जा सकता है, तो भैरुंदा को जिला का दर्जा देने में देर क्यों?
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर विदिशा को निगम बनाने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद यह मुद्दा दोबारा सुर्खियों में आ गया है।

क्या है पूरा मामला?
- भैरुंदा वर्तमान में सीहोर जिले का हिस्सा है।
- यह इलाका पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रभाव क्षेत्र बुधनी विधानसभा में आता है।
- स्थानीय लोग कई वर्षों से इसे स्वतंत्र जिला घोषित करने की मांग कर रहे हैं।
- विदिशा के निगम बनने की खबर के बाद इस मांग में नई ऊर्जा आ गई है।
स्थानीय लोगों की समस्याएँ
भैरुंदा क्षेत्र के लोग कहते हैं कि यहाँ विकास की गति बेहद धीमी है।
उनका कहना है कि प्रशासनिक दूरी और सुविधाओं की कमी के कारण क्षेत्र पिछड़ता जा रहा है।
मुख्य समस्याएँ:
- शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव
- रोजगार और उद्योग के सीमित अवसर
- सड़क और सिंचाई ढांचे की कमजोरी
- हर प्रशासनिक काम के लिए सीहोर या भोपाल जाना पड़ता है
स्थानीय निवासी अशोक पटेल ने कहा —
“हमारे बच्चे पढ़ाई के लिए बाहर जाते हैं, मरीजों को इलाज के लिए सीहोर भेजना पड़ता है। अगर भैरुंदा जिला बन जाए तो लोगों को राहत मिलेगी।”
राजनीतिक पृष्ठभूमि
भैरुंदा, शिवराज सिंह चौहान के राजनीतिक सफर से गहराई से जुड़ा हुआ है।
यह इलाका उनके गृह क्षेत्र बुधनी विधानसभा के अंतर्गत आता है।
लोगों का कहना है कि भले ही यह पूर्व मुख्यमंत्री का क्षेत्र हो, लेकिन विकास के मामले में अब भी यह इलाका उपेक्षित है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा 2028 के विधानसभा चुनावों में एक बड़ा राजनीतिक एजेंडा बन सकता है।
विदिशा से तुलना —
लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है —
“जब विदिशा को शिवराज सिंह चौहान की सिफारिश पर नगर निगम बनाया जा सकता है, तो भैरुंदा को जिला क्यों नहीं?”
दोनों ही शिवराज सिंह चौहान के संसदीय क्षेत्र का हिस्सा हैं, इसलिए भैरुंदा के लोग इसे राजनीतिक असंतुलन के रूप में देख रहे हैं।
अब लोगों की उम्मीदें नई सरकार से
- मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार से लोगों को उम्मीद है कि इस बार उनकी आवाज़ सुनी जाएगी।
- राज्य और केंद्र दोनों जगह भाजपा की सरकार होने के कारण लोगों को भरोसा है कि इस मुद्दे पर अब कार्रवाई होगी।
- बताया जा रहा है कि राज्य प्रशासन संभावित परिसीमन (Delimitation) की तैयारी कर रहा है, जिसमें नए जिलों के गठन पर भी विचार हो सकता है।
भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष रवि मालवीय ने कहा —
“यह मामला पूरी तरह से राज्य स्तर का है। परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कोई ठोस कदम उठाया जा सकेगा।”
वहीं, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने भी सरकार पर क्षेत्रीय भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि भैरुंदा की अनदेखी अब और बर्दाश्त नहीं होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भैरुंदा को जिला बनाया जाता है, तो इससे
- सीहोर जिले का प्रशासनिक दबाव कम होगा
- नए निवेश और रोजगार के अवसर खुलेंगे
- और यह क्षेत्र मालवा-नर्मदा बेल्ट के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेगा।
फिलहाल सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन लोगों की उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं।