रीवा सोलर पार्क से अब दौड़ेगी भोपाल-इंदौर मेट्रो — मध्य प्रदेश बना ग्रीन एनर्जी का पावरहाउस
रीवा (मध्य प्रदेश)
मध्य प्रदेश के रीवा जिले ने एक बार फिर देश को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नई दिशा दी है।
रीवा सोलर पार्क, जो पहले से ही दिल्ली मेट्रो को सौर ऊर्जा सप्लाई कर रहा है, अब भोपाल और इंदौर मेट्रो को भी ग्रीन एनर्जी (Solar Power) उपलब्ध कराएगा।
इससे न केवल राज्य का कार्बन फुटप्रिंट कम होगा बल्कि बिजली का खर्च भी बड़ी मात्रा में घटेगा।

रीवा सोलर पार्क से अब मेट्रो दौड़ेगी
राज्य सरकार ने घोषणा की है कि रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क (Rewa Ultra Mega Solar Power Project) से अब भोपाल और इंदौर मेट्रो रेल प्रोजेक्ट्स को भी बिजली दी जाएगी।
साल 2026 तक यह योजना पूरी तरह लागू हो जाएगी।
अधिकारियों के मुताबिक, इससे दोनों शहरों की मेट्रो ट्रेनों को 100% स्वच्छ ऊर्जा से चलाने का लक्ष्य रखा गया है।
दिल्ली मेट्रो को पहले से मिल रही है रीवा की बिजली
रीवा सोलर पार्क देश में पहली ऐसी परियोजना है जो किसी मेट्रो सिस्टम को सीधा ग्रीन पावर सप्लाई करती है।
वर्तमान में दिल्ली मेट्रो की 60% से अधिक बिजली रीवा से ही मिलती है।
अब भोपाल और इंदौर मेट्रो भी इसी मॉडल पर जुड़ेंगी।
इससे न केवल फ्यूल कॉस्ट घटेगी बल्कि यह कदम सस्टेनेबल अर्बन ट्रांसपोर्टेशन (Sustainable Urban Transportation) की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।
क्या है योजना का उद्देश्य?
- रीवा सोलर पार्क से सीधे ग्रीन एनर्जी सप्लाई
- मेट्रो संचालन में कार्बन उत्सर्जन में 40% कमी
- बिजली खर्च में 30–40% तक की बचत
- मध्य प्रदेश को ग्रीन एनर्जी हब बनाना
राज्य सरकार का कहना है कि इससे हर साल लगभग 10 लाख टन CO₂ उत्सर्जन में कमी आएगी।
रीवा सोलर पार्क: एशिया की ऊर्जा शान
- यह एशिया के सबसे बड़े सोलर पार्कों में से एक है
- इसकी वर्तमान क्षमता 750 मेगावाट (MW) है
- रीवा की गुढ़ तहसील में फैला यह पार्क लगभग 1500 हेक्टेयर भूमि पर बना है
- इसे बनाने में ₹2800 करोड़ रुपये की लागत आई
- इसे रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड (RUMSL) ने विकसित किया, जो MP Urja Vikas Nigam और Solar Energy Corporation of India (SECI) की संयुक्त पहल है
स्थानीय युवाओं को भी मिला रोजगार
रीवा सोलर पार्क ने स्थानीय विकास में भी अहम भूमिका निभाई है।
गांवों के सैकड़ों युवाओं को तकनीकी, सुरक्षा और मेंटेनेंस से जुड़ी नौकरियां मिली हैं।
पहले जो लोग रोजगार के लिए शहरों की ओर जाते थे, अब उन्हें अपने ही जिले में स्थायी रोजगार मिल रहा है।
भविष्य की योजनाएँ
सरकार अब रीवा सोलर पार्क की क्षमता को 750 MW से बढ़ाकर 1200 MW करने की तैयारी में है।
इसके लिए लगभग 800 एकड़ नई भूमि चिन्हित की जा चुकी है।
भविष्य में ग्वालियर, जबलपुर और सागर जैसे शहरों की मेट्रो और इलेक्ट्रिक बसें भी रीवा की सौर ऊर्जा से चलाने की योजना है।
पर्यावरण और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
रीवा सोलर पार्क ने भारत को “ग्रीन एनर्जी मिशन 2030” की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ाया है।
इससे न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण होगा बल्कि मध्य प्रदेश देश के सबसे बड़े क्लीन एनर्जी हब्स में शामिल हो जाएगा।
राज्य सरकार का कहना है —
“रीवा की सौर ऊर्जा अब सिर्फ बिजली नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की नई पहचान बन रही है।”