भोपाल-इंदौर हाईवे पर बनेगा 31 करोड़ का नया फ्लाईओवर, सिंहस्थ 2028 से पहले पूरा होगा निर्माण कार्य
भोपाल-इंदौर हाईवे के खजूरी जंक्शन पर 31 करोड़ रुपये की लागत से नया छह-लेन फ्लाईओवर बनेगा। मध्य प्रदेश सरकार ने प्रोजेक्ट को 2028 सिंहस्थ से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा है। जानिए इससे क्या फायदे होंगे और किस तरह बदलेगा ट्रैफिक सिस्टम।

भोपाल-इंदौर हाईवे को मिलेगा नया फ्लाईओवर: ट्रैफिक जाम से राहत की उम्मीद
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और व्यावसायिक केंद्र इंदौर के बीच सफर अब और आसान होने जा रहा है। राज्य सरकार ने भोपाल-इंदौर हाईवे (NH-46) पर 31 करोड़ रुपये की लागत से नया छह-लेन फ्लाईओवर बनाने की मंजूरी दे दी है।
यह फ्लाईओवर खजूरी जंक्शन (11 मील) पर बनाया जाएगा, जहां रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं और अक्सर ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है। सरकार का लक्ष्य है कि यह प्रोजेक्ट सिंहस्थ महाकुंभ 2028 से पहले पूरा कर लिया जाए ताकि आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को सुगम यातायात मिल सके।
प्रोजेक्ट की प्रमुख विशेषताएं
- स्थान: 11 मील खजूरी जंक्शन, भोपाल-इंदौर हाईवे
- लागत: ₹31 करोड़
- लंबाई: लगभग 850 मीटर
- डिजाइन: छह-लेन फ्लाईओवर
- समयसीमा: 18 महीने
- संचालन एजेंसी: मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC)
यह प्रोजेक्ट राज्य सरकार के “स्मार्ट रोड मिशन” और “इंफ्रास्ट्रक्चर बूस्ट प्लान 2025” के तहत शुरू किया जा रहा है।
क्यों जरूरी है यह फ्लाईओवर?
1. ट्रैफिक जाम से राहत
खजूरी जंक्शन पर रोजाना 20,000 से ज्यादा वाहन गुजरते हैं।
पीक ऑवर्स में कई किलोमीटर लंबा जाम लग जाता है जिससे न सिर्फ समय बल्कि ईंधन की भी भारी बर्बादी होती है।
2. दुर्घटनाओं में कमी
ट्रैफिक दबाव के कारण इस क्षेत्र में दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ी है। फ्लाईओवर बनने के बाद स्थानीय व बाहरी यातायात अलग-अलग लेवल पर संचालित होगा, जिससे सड़क सुरक्षा बेहतर होगी।
3. सिंहस्थ 2028 की तैयारी
2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ में करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।
भोपाल-इंदौर मार्ग उस समय एक प्रमुख रूट रहेगा। इस फ्लाईओवर से आपातकालीन और VIP मूवमेंट आसान होगा।
4. आर्थिक लाभ
फ्लाईओवर से दोनों शहरों के बीच औद्योगिक व लॉजिस्टिक गतिविधियों में तेजी आएगी।
इसके निर्माण से स्थानीय स्तर पर रोजगार भी उत्पन्न होंगे।
कैसा होगा नया फ्लाईओवर?
फ्लाईओवर का डिजाइन अत्याधुनिक तकनीक से तैयार किया गया है।
- कुल लंबाई: 850 मीटर
- लेन चौड़ाई: 3.5 मीटर प्रति लेन
- ड्रेनेज सिस्टम: मॉडर्न रेनवाटर ड्रेनेज पाइपिंग
- लाइटिंग: ऊर्जा-संवर्धन LED स्ट्रीट लाइट्स
- सर्विस रोड: दोनों ओर लोकल ट्रैफिक के लिए अलग रास्ते
MPRDC अधिकारियों के अनुसार, यह फ्लाईओवर “ग्रीन कॉरिडोर” की अवधारणा पर आधारित होगा, यानी सड़क किनारे हरियाली और प्रदूषण नियंत्रण की विशेष व्यवस्था की जाएगी।
सिंहस्थ 2028 और इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट
मध्य प्रदेश सरकार सिंहस्थ 2028 को लेकर बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही है।
कुछ प्रमुख प्रोजेक्ट्स —
- इंदौर-उज्जैन रोड को छह लेन में बदला जा रहा है।
- भोपाल बायपास एक्सप्रेसवे का चौड़ीकरण जारी है।
- उज्जैन में 6000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।
- महाकाल मंदिर तक रोप-वे और स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम पर काम जारी है।
इस फ्लाईओवर प्रोजेक्ट को उसी श्रृंखला का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है, जो पूरे मध्य प्रदेश को “स्मार्ट कनेक्टिविटी ज़ोन” में तब्दील करेगा।
स्थानीय लोगों को क्या फायदा होगा?
स्थानीय निवासियों और यात्रियों को इस प्रोजेक्ट से कई लाभ मिलेंगे —
- जाम से राहत: पीक आवर्स में ट्रैफिक फ्लो बेहतर होगा।
- समय और ईंधन की बचत: यात्रा में 15-20 मिनट का समय बचेगा।
- प्रदूषण में कमी: रुकावटों के कम होने से कार्बन उत्सर्जन घटेगा।
- क्षेत्र का विकास: खजूरी और आसपास के क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ेंगी।
सरकार की योजना और निगरानी
राज्य सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए सख्त मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया है।
- प्रोजेक्ट रिव्यू हर माह किया जाएगा।
- क्वालिटी कंट्रोल यूनिट निर्माण सामग्री की जांच करेगी।
- पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
- स्थानीय मजदूरों को रोजगार प्राथमिकता पर मिलेगा।
लोक निर्माण विभाग के एक अधिकारी के अनुसार —
“हमारी प्राथमिकता है कि यह फ्लाईओवर सिंहस्थ 2028 से छह महीने पहले ही पूरा कर लिया जाए ताकि ट्रायल और टेस्टिंग समय पर हो सके।”
निष्कर्ष: विकास की नई उड़ान
भोपाल-इंदौर फ्लाईओवर प्रोजेक्ट न सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड है, बल्कि यह मध्य प्रदेश के “विकसित राज्य” बनने की दिशा में ठोस कदम है।
इससे न केवल ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि आर्थिक गतिविधियों और पर्यटन को भी नई गति मिलेगी।
सिंहस्थ 2028 तक इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से करोड़ों श्रद्धालुओं और यात्रियों को राहत मिलेगी।
सरकार का यह कदम साबित करता है कि मध्य प्रदेश अब स्मार्ट रोड, सेफ ट्रैफिक और सस्टेनेबल डेवलपमेंट की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
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