भोपाल में (SIR) सर्वे का साया: , शिक्षा-स्वास्थ्य दोनों प्रभावित
भोपाल।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में राज्य-स्तरीय एसआईआर सर्वे (Special Intensive Revision of वोटर लिस्ट) ने शिक्षा व स्वास्थ्य दोनों ही बुनियादी प्रणालियों को झकझोर दिया है। इस प्रक्रिया के चलते लगभग 12,000 सरकारी स्कूल शिक्षकों को उनकी कक्षाओं से हटाकर बूथ-स्तर अधिकारी (BLO) की ड्यूटी पर तैनात किया गया है। अकेले भोपाल जिले में ही लगभग 1,000 शिक्षक इस अभियान में जुटे हैं। इससे स्कूलों में पढ़ाई बाधित हुई है और स्वास्थ्य विभाग की डेंगू-नियंत्रण गतिविधियाँ भी प्रभावित हो रही हैं।

📚 शिक्षा व्यवस्था पर गहरा असर
SIR सर्वे के तहत जब शिक्षकों को BLO ड्यूटी पर लगाया गया, तो अनेक स्कूलों में कक्षा-संचालन ठप हो गया। विशेषकर उन स्कूलों में जहाँ पहले से ही शिक्षक-संख्या सीमित थी। एकल-शिक्षक वाले विद्यालयों में भी वही एक शिक्षक BLO ड्यूटी पर जाने से पढ़ाई पूरी तरह खाली पड़ गई।
मध्यावधि व प्री-बोर्ड परीक्षाओं के बीच यह समस्या और अधिक गहरी बन गई है — कक्षाओं में अभिभावकों व छात्रों में चिंता बढ़ी है कि परीक्षा-तैयारी व पढ़ाई सुचारू नहीं चल पा रही।
शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी है कि शिक्षकों की अनुपस्थिति से शिक्षा प्रभावित हो रही है, लेकिन SIR अभियान भी एक जरूरी प्रक्रिया है जिसे देर तक रोकना संभव नहीं था।
🦟 स्वास्थ्य सेवाओं को झटका
शिक्षकों की तरह स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी भी SIR सर्वे में तैनात हो गए हैं — जिससे डेंगू-वायरस जैसी बीमारियों के नियंत्रण पर खतरे की घंटियाँ बज गई हैं। मच्छर-लार्वा सर्वेक्षण, फॉगिंग अभियान, मलेरिया/डेंगू रक्षा टीमों की गतिविधियाँ लगभग ठप पड़ी हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि वर्षा-मौसम के बाद डेंगू का जोखिम बढ़ जाता है, ऐसे में यह देरी गंभीर हो सकती है और सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट भी उत्पन्न हो सकता है।
🔍 SIR सर्वे क्या है – और क्यों जरूरी?
SIR अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को जाँचना-सुधारना है — घर-घर जाकर मतदाताओं के रिकॉर्ड सत्यापन करना, दस्तावेज़ मिलान करना तथा सुनिश्चित करना कि सूची में त्रुटियाँ न हों।
मध्य प्रदेश में इस प्रक्रिया में लगभग 65,014 बूथ-स्तर अधिकारी (BLOs) तैनात किए गए हैं और राज्य की लगभग 5.74 करोड़ मतदाताओं को शामिल किया जा रहा है।
हालाँकि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका एजुकेशन व हेल्थ सेक्टर पर असमय प्रभाव गंभीर रूप से देखा जा रहा है।
💡 समाधान के सुझाव
इस समस्या से निपटने के लिए निम्नलिखित उपाय सुझाए जा रहे हैं:
- शिक्षकों की केवल सीमित संख्या को BLO ड्यूटी में लगाया जाए, ताकि कक्षाओं का संचालन बाधित न हो।
- शिक्षा व स्वास्थ्य जैसे बुनियादी विभागों के कर्मचारी कम-से-कम समय तक BLO ड्यूटी पर जाएँ — अन्य अधीनस्थ विभागों से अधिक प्रतिभूति तैनात की जाए।
- SIR सर्वे का समय-निर्धारण ऐसा हो कि परीक्षा-महीनों या स्कूल बंद समय में ज्यादा सक्रिय हो, जिससे पढ़ाई कम प्रभावित हो।
- डिजिटल व ऑनलाइन समाधान अपनाएं — जहाँ संभव हो, BLO टीम को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सत्यापन करना चाहिए ताकि मानव संसाधन पर बोझ कम हो।
- स्वास्थ्य विभाग को विशेष अलर्ट पर रखा जाए — डेंगू-मच्छर नियंत्रण व फॉगिंग जैसी गतिविधियाँ निरंतर चलती रहें।
📊 आंकड़ों में स्थिति
| क्षेत्र | प्रभावित संख्या | प्रमुख प्रभाव |
|---|---|---|
| शिक्षा | ~12,000 शिक्षक | कक्षाएँ बंद, परीक्षा संचालन प्रभावित |
| स्वास्थ्य | मच्छर-निगरानी व फॉगिंग काम ठप | डेंगू व मलेरिया जोखिम बढ़ा |
| भोपाल जिला | ~1,000 शिक्षक (इस जिले में) | स्थानीय स्कूल विशेष रूप से प्रभावित |
🎯 निष्कर्ष
भोपाल में SIR सर्वे की वजह से उत्पन्न हुई स्थिति यह दिखाती है कि सरकारी योजनाओं, विशेष अभियानों और व्यवहार में संतुलन बनाना कितना आवश्यक है। एक ओर जहाँ मतदाता सूची-सत्यापन जैसे अभियान लोकतंत्र के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में चल रही प्रक्रियाएँ भी समाज की बुनियादी जरूरतें हैं — जो प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस तरह की प्रक्रिया के दौरान सार्वजनिक-सेवा विभागों का संचालन बाधित न हो और जनता का भरोसा सुरक्षित रहे।
यदि आप चाहें, तो इस पर राजनीतिक दृष्टिकोण, प्रदेश-विभिन्न जिलों की तुलना, और विद्यार्थियों व स्कूल-प्रशासन की आवाज़ सहित एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सकता हूँ — क्या यही करना चाहेंगे?