ग्वालियर में दिल दहला देने वाला हादसा: सल्फास की जहरीली गैस ने 4 साल के मासूम की ली जान, परिवार अस्पताल में जिंदगी से लड़ रहा
ग्वालियर में सल्फास से निकली जहरीली गैस के कारण 4 साल के मासूम की मौत, परिवार गंभीर। पुलिस जांच जारी, मकान मालिक पर लापरवाही के आरोप।

ग्वालियर, मध्य प्रदेश। शहर के जड़ेरूआ इलाके से एक बेहद दर्दनाक और दिल को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। एक किराए के मकान में रखे गए कीटनाशक (सल्फास) से निकली जहरीली गैस ने चार साल के बच्चे की जान ले ली, जबकि उसके माता-पिता और बड़ी बहन की हालत गंभीर बनी हुई है। यह घटना न सिर्फ एक परिवार की खुशियाँ छीन ले गई, बल्कि घर में कीटनाशक रखने के खतरों और लापरवाही पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है।
कैसे हुआ हादसा? क्या है पूरा मामला?
हादसा रविवार की सुबह हुआ। सत्येंद्र शर्मा, उनकी पत्नी रजनी शर्मा और दो बच्चे वैभव (4 वर्ष) और आस्मिता (8 वर्ष) इस मकान में किराए पर रहते थे।
मकान मालिक ने गेहूं में कीड़ों से बचाव के लिए सल्फास की गोलियां रखी थीं।
रात भर में इन गोलियों से फॉस्फीन गैस (Phosphine Gas) निकलकर पूरे घर में फैल गई।
यह गैस:
- गंधहीन होती है
- शरीर में पहुँचते ही फेफड़े, दिल और किडनी को नुकसान पहुंचाती है
- कम समय में ही सांस रुकने और बेहोशी का कारण बनती है
सुबह जब परिवार को सांस लेने में दिक्कत हुई, तब तक 4 साल का वैभव दम तोड़ चुका था।
परिवार की हालत — दहाड़ मारकर रो पड़ी दादी
मृतक वैभव की दादी का बयान सुनने वालों की आंखें नम कर देता है।
उन्होंने बताया:
“मेरे बेटे की पाँच बेटियाँ थीं… कई सालों की मन्नत के बाद वैभव हुआ था।
हमारा इकलौता वारिस, हमारा सहारा…
एक लापरवाही ने उसे हमसे छीन लिया।”
वर्तमान स्थिति:
- पिता सत्येंद्र शर्मा — वेंटिलेटर पर
- मां रजनी शर्मा — हालत गंभीर
- 8 साल की बेटी का भी अस्पताल में इलाज जारी
डॉक्टरों के अनुसार, पूरा परिवार फॉस्फीन गैस से प्रभावित हुआ है, और स्थिति अभी भी नाज़ुक है।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
घटना के बाद गोला मंदिर थाना पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की।
अब तक की कार्रवाई:
| कार्रवाई | स्थिति |
|---|---|
| फोरेंसिक टीम ने सैंपल लिए | ✅ गेहूं और सल्फास की गोलियों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए |
| मकान मालिक से पूछताछ | ✅ जारी |
| केस दर्ज | ✅ धारा 304A (लापरवाही से मौत) पर जांच आगे बढ़ सकती है |
| पोस्टमॉर्टम | ✅ रिपोर्ट का इंतजार |
सीएसपी अतुल सोनी ने कहा:
“यह बेहद गंभीर मामला है।
यदि यह साबित हुआ कि कीटनाशक असुरक्षित ढंग से रखा गया था,
तो मकान मालिक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
सल्फास और फॉस्फीन गैस आखिर कितनी खतरनाक है?
सल्फास (Aluminium Phosphide) को ग्रामीण क्षेत्रों में अनाज भंडारण में अक्सर उपयोग किया जाता है।
लेकिन इसके साथ यह बेहद घातक जहर भी है।
| प्रभाव | समय |
|---|---|
| सांस लेने में तकलीफ | 10–15 मिनट में |
| शरीर कांपना, उलटी | 30 मिनट में |
| बेहोशी, हार्ट फेल | 1–3 घंटे में |
| मौत | कुछ घंटों में |
यही वजह है कि सरकारी निर्देश हैं कि सल्फास को:
- घर से अलग
- हवादार स्थान
- और बंद कंटेनर में रखा जाए
लेकिन अक्सर अनभिज्ञता और लापरवाही से हादसे हो जाते हैं।
यह हादसा सिर्फ एक घर की त्रासदी नहीं — एक चेतावनी है
ग्वालियर की यह घटना हमें सिखाती है कि:
- कीटनाशक रहने वाली जगहों से दूर रखें
- इनके इस्तेमाल पर गाइडलाइन का पालन जरूरी है
- बच्चों वाले घरों में ऐसे रसायनों को कभी भी खुले में न रखें
एक छोटी सी लापरवाही, पूरे परिवार की खुशियाँ छीन सकती है।
सोशल मीडिया पर लोगों की पीड़ा
#GwaliorNews, #ToxicGasTragedy, #ChildSafety, #SalphasPoisoning जैसे हैशटैग ट्विटर और फेसबुक पर ट्रेंड कर रहे हैं।
लोग शोक के साथ गुस्सा भी व्यक्त कर रहे हैं।
निष्कर्ष
ग्वालियर की यह घटना एक हृदयविदारक त्रासदी है।
एक मासूम की मौत और पूरा परिवार मौत से लड़ रहा है — सिर्फ इसलिए कि जहरीला रसायन घर में असुरक्षित तरीके से रखा गया था।
अब सवाल यह है कि:
- क्या जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई होगी?
- क्या ऐसे हादसों को रोकने के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा?
समाज और प्रशासन — दोनों को सीखने की जरूरत है।