High Court lawyer Abhijita इंदौर: हाईकोर्ट वकील अभिजीता ने अंगदान से आठ लोगों को दी नई जिंदगी, पति ने मंगलसूत्र पहनाकर दी अंतिम विदाई

इंदौर: हाईकोर्ट वकील अभिजीता ने अंगदान से आठ लोगों को दी नई जिंदगी, पति ने मंगलसूत्र पहनाकर दी अंतिम विदाई

इंदौर। इंदौर शहर ने एक बार फिर मानवता की मिसाल पेश की है। हाईकोर्ट की वकील High Court lawyer Abhijita अभिजीता सिंह राठौर (38) ने अपनी मृत्यु के बाद अंगदान करके आठ लोगों को नया जीवन दान दे दिया। ब्रेन डेड होने के बाद उनके परिवार ने यह महत्वपूर्ण फैसला लिया, जिससे कई लोगों की जिंदगी में रोशनी आई। अंगदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनके पति प्रवीण राठौर ने उन्हें मंगलसूत्र पहनाकर भावुक अंतिम विदाई दी।

क्या हुआ था अभिजीता के साथ? एक प्रतिभाशाली वकील का अचानक बिगड़ा स्वास्थ्य

अभिजीता राठौर मूल रूप से उज्जैन के रहने वाले एक प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखती थीं। वह एक प्रतिभाशाली वकील थीं, जिन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद वकालत की डिग्री हासिल की थी।

· अस्पताल में भर्ती: 23 अक्टूबर को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें इंदौर के जूपिटर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
· गंभीर बीमारी: उन्हें निमोनिया हो गया था, जिसकी वजह से उन्हें सीवियर ब्रेन हेमरेज (दिमाग में गंभीर रक्तस्राव) हो गया।
· ब्रेन डेड घोषित: कई दिनों तक चले इलाज के बाद भी उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और डॉक्टरों की एक पैनल ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इसका मतलब था कि उनका दिमाग पूरी तरह से काम करना बंद कर चुका था।

परिवार का साहसिक फैसला: आठ लोगों को मिली नई जिंदगी

जब डॉक्टरों ने परिवार को बताया कि अभिजीता के बाकी अंग पूरी तरह से स्वस्थ हैं और इन्हें दान करके कई लोगों की जान बचाई जा सकती है, तो परिवार ने यह कठिन लेकिन महान फैसला लिया।

अभिजीता के पति प्रवीण राठौर, मां गिरीबाला राठौर और भाई अभिजीत सिंह राठौर (लोक अभियोजक) ने अंगदान की सहमति दे दी। इस फैसले के बाद इंदौर में 65वां ग्रीन कॉरिडोर बना।

अभिजीता के दान किए गए अंग और उनसे होने वाले फायदे:

· लिवर: सीएचएल अस्पताल में 50 वर्षीय एक पुरुष को ट्रांसप्लांट किया गया।
· दोनों किडनी: एक किडनी जूपिटर अस्पताल में 35 वर्षीय महिला को और दूसरी चोइथराम अस्पताल में 27 वर्षीय पुरुष को लगाई गई।
· हृदय वाल्व और अन्य ऊतक: उनके हृदय वाल्व और त्वचा जैसे ऊतक भी दान किए गए, जिनसे कई अन्य मरीजों को लाभ मिलेगा।

कुल मिलाकर, अभिजीता के इस नेक कदम से आठ लोगों को सीधे तौर पर नया जीवन मिला है।

भावुक विदाई: पति ने पहनाया मंगलसूत्र, मिला गार्ड ऑफ ऑनर

अंगदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद का दृश्य बेहद भावुक था। उनके पति प्रवीण राठौर ने अभिजीता को एक बार फिर से मंगलसूत्र पहनाया। यह उनकी अटूट शादीशुदा जिंदगी का प्रतीक था और इससे यह संदेश मिलता है कि अभिजीता हमेशा उनके और उनके बच्चों के दिल में जिंदा रहेंगी।

इस महान दान के लिए जिला प्रशासन की ओर से उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया गया। उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

अभिजीता का व्यक्तित्व: एक मेधावी छात्रा से सफल वकील तक का सफर

अभिजीता ने अपने जीवन में कई उपलब्धियां हासिल कीं:

· उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स और इंस्ट्रूमेंटेशन में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की।
· गर्भवती होने के दौरान भी उन्होंने वकालत की पढ़ाई जारी रखी और एलएलबी की डिग्री प्राप्त की।
· इसके बाद उन्होंने क्रिमिनोलॉजी में एलएलएम (मास्टर्स) भी किया।
· वह अपने भाई का साथ देने के लिए वकील बनी थीं और हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करती थीं।
· उनके दो बच्चे हैं – 13 साल की बेटी पर्णिका और 5 साल का बेटा अभिरत्न।

अभिजीता ने अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान भगवान गणेश का एक चित्र भी बनाया था, जो उनकी कलात्मक रुचि को दर्शाता है।

निष्कर्ष: अभिजीता राठौर की कहानी सिर्फ एक अंगदान की कहानी नहीं है, बल्कि जीवन और मृत्यु के बीच एक सेतु बनने की कहानी है। उनके और उनके परिवार के इस साहसिक फैसले ने न सिर्फ आठ लोगों को नया जीवन दिया, बल्कि पूरे समाज के लिए एक नई रोशनी और प्रेरणा का काम किया है।

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